फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   The colors of a hundred springs of the century reside in his eyes.

Lucknow News: उनकी आंखों में बसे हैं सदी के सौ वसंतों के रंग

Sun, 02 Feb 2025 01:55 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2025 01:55 AM IST
विज्ञापन
The colors of a hundred springs of the century reside in his eyes.

विज्ञापन
लखनऊ। उनकी आंखों में पूरी एक सदी ठहरी हुई है। ...या यूं कहें कि सौ साल की यादें आज भी उनकी आंखों में कैद हैं। इन यादों में देश के बंटवारे का दर्द है तो पाकिस्तान से पलायन की पीड़ा भी। देश को साल दर साल उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हुए देखने की खुशी है तो चेहरे की झुर्रियों में अनगिनत किस्से और कहानियों का डेरा भी है।



आज हम आपका परिचय जिस शख्सियत से कराने जा रहे हैं उनका नाम है एडवोकेट कृष्ण लाल गुरनानी, जिन्होंने शनिवार को अपने जीवन के सौ वसंत पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता के घर पर जश्न का माहौल रहा। सुबह से ही बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था। देर रात तक उनके नेशनल पीजी कॉलेज रोड स्थित आवास पर जश्न और दावत का दौर चलता रहा। अमर उजाला की टीम ने उनके आवास पर जाकर उनके सौ साल के सफरनामे के बारे में जाना तो पता चला कि कठोर संघर्ष से सफलता तक का यह सफर इतना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुरानी यादों का जिक्र छिड़ते ही वे कभी खुश तो कभी भावुक होते रहे। इस उम्र में भी याददाश्त नवयुवकों जैसी ही है।
विज्ञापन






पाकिस्तान में बड़ा घर-जायदाद छोड़कर आना पड़ा



वरिष्ठ अधिवक्ता केएल गुरनानी ने बताया कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्खर जिले में उनका बहुत बड़ा मकान और ठीक-ठाक जायदाद थी, लेकिन 1947 में सबकुछ छोड़कर आना पड़ा। पत्नी रत्ना और भाइयों के साथ भारत आए और फिर लखनऊ में रोजी-रोटी की तलाश शुरू की। सिंधी परिवार में जन्मे कृष्ण लाल ने 12वीं तक की पढ़ाई लाहौर से की। लखनऊ आकर उन्हें आपूर्ति विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई, लेकिन 11 महीने बाद ही उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी। इसके बाद 1950 में लखनऊ से ही बीए पूरा किया। एलएलबी के साथ ही इकनॉमिक्स में एमए भी किया। इसके बाद 1953 में वकालत शुरू की।
विज्ञापन
विज्ञापन





अटल-आडवाणी के बेहद करीबी रहे



केएल गुरनानी बताते हैं कि वे जनसंघ से लंबे समय तक जुड़े रहे। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में भी रहे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के भी खास रहे। बताया कि जिस समय अटल जी प्रधानमंत्री थे तो उनके निवास पर भी आए। इससे पहले वे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध समिति के वकील भी रह चुके हैं। इस समय वे हरिओम मंदिर लालबाग में एल्डर्स कमेटी के संरक्षक और अध्यक्ष हैं।



94 वर्षीय पत्नी रत्ना ने हर कदम पर निभाया साथ



केएल गुरनानी बताते हैं कि पाकिस्तान से पलायन के समय से आज तक उनकी पत्नी 94 वर्षीय रत्ना ने हर कदम पर साथ निभाया। रत्ना गुरनानी कहती हैं कि जब हम बंटवारे के बाद लखनऊ आए तो सर्द रातों में ओढ़ने के लिए पर्याप्त कपड़े तक नहीं थे, लेकिन मेरे पति और देवरों ने हिम्मत नहीं हारी और जी-तोड़ मेहनत कर संघर्ष से सफलता तक का सफर तय किया। केएल गुरनानी के बेटे अनूप गुरनानी भी लखनऊ हाईकोर्ट में वकील हैं तो वहीं उनके पौत्र योगेश गुरनानी व पौत्रवधू अमृता भी अधिवक्ता हैं। अनूप गुरनानी की दो बेटियां मिशा और श्रुति हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed