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नई पीढ़ी को अयोध्या आंदोलन का पूरा इतिहास बताएगी किताब

Fri, 15 Nov 2019 02:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 Nov 2019 02:09 AM IST
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The book will tell new generation about complete history of the Ayodhya movement
demo pic - फोटो : Amar Ujala Graphics

‘यदि राष्ट्र की धरती छिन जाए तो शौर्य उसे वापस ला सकता है, यदि धन नष्ट हो जाए तो परिश्रम से कमाया जा सकता है, यदि राजसत्ता छिन जाए तो पराक्रम उसे वापस ला सकता है परंतु यदि राष्ट्र की चेतना सो जाए, राष्ट्र अपनी पहचान खो दे तो कोई भी शौर्य, श्रम या पराक्रम उसे वापस नहीं ला सकता। इसी कारण भारत के वीर सपूतों ने भीषण, विषम परिस्थितियों में, लाखों अवरोधों के बाद भी राष्ट्र की इस चेतना को जगाए रखा। इसी चेतना और पहचान को बचाए रखने का प्रतीक है, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का संकल्प...

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ये उस किताब के शुरुआती वाक्य हैं जिसे विहिप ने देश की नई पीढ़ी के बीच बंटवाने के लिए मार्च 2010 में छपवाया था। पर, तब दौर मंदिर निर्माण के संघर्ष का ही था। किताब छपने तक न उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का और न ही सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया था। 
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विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल की पहल पर हिंदुओं की युवा पीढ़ी को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए छपवाई गई इस किताब का नतीजा उत्साहजनक रहा। आंदोलन से बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ने में कामयाबी मिली। पर, मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने और निर्णय आने में लगभग एक दशक और बीत गया। 
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इसलिए विहिप ने अब इस आंदोलन का पूरा इतिहास युवाओं और भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस किताब को नए सिरे से छपवाने की योजना बनाई है। जिससे नई पीढ़ी को बताया जा सके कि कितने संघर्ष के बाद हिंदुत्व की संस्कृति के प्रतीक इस स्थल को वापस लेकर सांस्कृतिक गौरव की रक्षा की जा सकी है।

लगती है यह वजह
दरअसल, विहिप ही नहीं बल्कि पूरा संघ परिवार कंप्यूटर और प्रबंधन तथा प्रोफेशनलिज्म के इस युग में भी हिंदू युवाओं में आई हिंदुत्व की चेतना को लेकर पहले काफी चिंतित था। पर, पिछले दिनों संघ के शारीरिक प्रशिक्षण वर्गों में जिस तरह पहले की तुलना में युवाओं ने भागीदारी की उसने संघ परिवार को गदगद कर दिया है। 

पिछले कुछ वर्षों में मंदिर मुद्दे सहित हिंदुत्व के स्वाभिमान से जुड़े अन्य विषयों पर जिस तरह युवा पीढ़ी सक्रिय रूप से प्रतिक्रियाएं देती दिखी उसने भी विहिप व  संघ नेतृत्व को इस मद्दे पर आश्वस्त किया है। फिर भी संघ और विहिप अभी निश्चिंत नहीं हैं। पिछले दिनों अयोध्या में आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि ‘राम मंदिर निर्माण को लेकर युवाओं पर ही पूरा भरोसा है’। 

इसी तरह विहिप के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि ‘हिंदू युवाओं में जो ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है वह राम मंदिर निर्माण के बाद ही शांत होगा’। इससे यह साबित करने की कोशिश की कि वे हिंदुत्व को लेकर युवाओं में बढ़े रुझान से उत्साहित हैं, पर यह कहकर कि ‘कुछ हिंदू विरोधी ताकतें भ्रम फैला रही हैं’ से जता दिया कि वे अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

क्या होगा नई किताब में
जानकारी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि व अयोध्या आंदोलन का इतिहास तस्वीरों के माध्यम से देने के साथ विवादित स्थल को राम जन्मभूमि स्थल साबित करने वाले प्रमाणों का उल्लेख रहेगा। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि किन तथ्यों के कारण संतों और विहिप ने यह आंदोलन शुरू किया था। आस्ट्रिया के पादरी फादर टाइफैन्थेलर की यात्रा वृत्तांत का सारांश रहेगा साथ ही अयोध्या से हिंदुओं के साथ जैन, सिख व बौद्ध पंथ के रिश्तों का भी उल्लेख रहेगा। संक्षिप्त में पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि बताते हुए प्रमुख घटनाओं को चुनिंदा तस्वीरों से समझाया जाएगा। मंदिर निर्माण के लिए किए गए प्रयत्नों व न्यायालय में चली कार्यवाही का पूरा उल्लेख रहेगा।

ताकि भावी पीढ़ी जान सके इतिहास
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि मंदिर मुक्ति के लिए वर्ष 1990 में अयोध्या में संघर्ष हुआ। वर्ष 1992 में ढांचा गिरा। सितंबर 2010 में उच्च न्यायालय का फैसला आया और अब 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर के पक्ष में निर्णय दिया।  पूरे घटनाक्रम को लगभग तीन दशक बीतने को हैं।


पीढ़ियां बदल गई। न्यायालय के फैसलों पर ही नजर डालें तो जो अब 20 साल के हैं वे उच्च न्यायालय के 2010 में फैसले के वक्त नौ-दस साल के ही रहे होंगे। जिन्होंने 2010 या उसके बाद जन्म लिया वे अब समझने लायक हो रहे हैं। इसलिए इस किताब को नए सिरे से छपवाने की योजना है जिससे इस आंदोलन की शुरुआत से अंत तक घटनाक्रम के बारे में मौजूदा पीढ़ी और भावी पीढ़ी तथ्यों सहित जान सके। अब यह आंदोलन अपनी मंजिल तक पहुंच चुका है, इसलिए यह किताब अपने आप में पूरा इतिहास बताने वाली होगी।

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