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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   TET Paper Leak Case: Paper sold for 10-10 thousand near Munshi Pulia intersection in Lucknow, STF recovered two paper sets of 6-6 pages

टीईटी पेपर लीक प्रकरण : लखनऊ में मुंशी पुलिया चौराहे के पास 10-10 हजार में बेचा पेपर, एसटीएफ ने बरामद किए 6-6 पेज के दो पेपर सेट 

Tue, 30 Nov 2021 08:26 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव इंद्र भूषण दुबे, अमर उजाला, लखनऊ
इंद्र भूषण दुबे, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 30 Nov 2021 08:26 AM IST
सार

एसटीएफ की अलग-अलग टीमें उन 20 लोगों की भी तलाश कर रही है जिनके नाम रविवार को हुई गिरफ्तारी में सामने में आए थे। 20 वांछित अभियुक्तों में 11 सॉल्वर हैं। सूत्रों के अनुसार अयोध्या से गिरफ्तार संदीप, रमेश और महेश के मुताबिक आधा दर्जन लोगों से संपर्क कर पैसे लेकर सॉल्वर की व्यवस्था की गई थी।

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TET Paper Leak Case: Paper sold for 10-10 thousand near Munshi Pulia intersection in Lucknow, STF recovered two paper sets of 6-6 pages
यूपी टीईटी पेपर लीक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने मुंशीपुलिया चौराहे के पास दस-दस हजार रुपयों में नौ लोगों को प्रश्नपत्र बेचे थे। एसटीएफ ने इनके पास से 6-6 पन्ने के दो सेट की फोटोकॉपी और करीब 35 हजार रुपये बरामद किए गए। आरोपियों से पूछताछ के अनुसार परीक्षार्थियों की जानकारी जुटाई जा रही है।  

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एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक रविवार को पेपर लीक करने वाला गिरोह मुंशी पुलिया चौराहे से टेढ़ी पुलिया जाने वाले रास्ते पर एक होंडा सिटी कार में बैठकर नेटवर्क चला रहा था। एजेंट परीक्षार्थियों से संपर्क कर डील फाइनल करते थे, फिर कार सवार सदस्यों के पास संदेश भेजकर प्रश्नपत्र की प्रतियां व्हाट्सएप पर भिजवाते थे। आरोपियों ने कुबूला कि वह प्रश्नपत्र के साथ उत्तर कुंजी भी दे रहे थे।
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एसटीएफ का दरोगा बना परीक्षार्थी का अभिभावक
एसटीएफ ने लखनऊ में पर्चा लीक करने वाले गिरोह को दबोचने केलिए एक एजेंट के जरिए प्रश्न पत्र व उत्तर कुंजी का सौदा किया। इसके लिए एसटीएफ में तैनात एक दरोगा टीईटी परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी का अभिभावक बना। इसके बाद उसने एजेंट के जरिए मुंशी पुलिया के पास कार सवार गिरोह के सक्रिय सदस्यों के पास पहुंचा। वहां पहुंचने के बाद पेपर खरीदने के लिए रुपये की बातचीत कर रहा था। पुष्टि होने के बाद चारों को दबोच लिया। पकड़े गये आरोपियों में कौशलेंद्र राय, अनुराग देश भरतार, चंद्र वर्मा व फौजदार उर्फ विकास वर्मा शामिल है।
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निक्की शर्मा ने दिया था पेपर
आरोपियों ने एसटीएफ केसामने कुबूल किया कि उनको निक्की शर्मा नाम के व्यक्ति ने मोबाइल के जरिए प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया था। दो सेट हस्त लिखित प्रश्नोत्तर मिला। जिस पर ‘बाल विकास एवं शिक्षा विधि’ अंकित है।  6 पन्नों के प्रश्नपत्र में 1 से 150 प्रश्न व उसके सामने उत्तरी सीट में उत्तर भी अंकित थे। प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने वाला निक्की शर्मा भडरा विद्यायल में शिक्षा मित्र है। उसने मोबाइल नंबर 9795092155 से प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया। इस पेपर को चारों ने हरदोई के मयूर वर्मा के मोबाइल नंबर 9415805721 और जानकीपुरम सेवा अस्पताल की रहने वाली काजल के मोबाइल 6306574376 पर भेजा है। इसके अलावा सात अन्य लोगों को भी पेपर बेचे है। उनके पास मिले प्रश्न पत्र को व्हाट्सएप पर मंगाने के बाद प्रिंट निकाला गया। इसके बाद उसकी छाया प्रति तैयार की गई। जिसके कारण पेपर धुंधला आ रहा था।

एसटीएफ के रडार पर बीस अभियुक्त, 20 वांछित अभियुक्तों से 11 सॉल्वर 

एसटीएफ की अलग-अलग टीमें उन 20 लोगों की भी तलाश कर रही है जिनके नाम रविवार को हुई गिरफ्तारी में सामने में आए थे। 20 वांछित अभियुक्तों में 11 सॉल्वर हैं। सूत्रों के अनुसार अयोध्या से गिरफ्तार संदीप, रमेश और महेश के मुताबिक आधा दर्जन लोगों से संपर्क कर पैसे लेकर सॉल्वर की व्यवस्था की गई थी। इसमें अयोध्या के आरबी एकेडमी इंटर कॉलेज में अभ्यर्थी रंजीत के स्थान पर अमन सिंह बतौर सॉल्वर परीक्षा में बैठा था। आशा बक्स भगवान सिंह महाविद्यालय दर्शन नगर में अंकित कुमार की जगह धर्मदास, राम सेवक इंटर कॉलेज में अनूप की जगह संतोष कुमार और ग्रामर इंटर कॉलेज लालबाग अयोध्या में प्रबल सिंह चौहान के स्थान पर अजीत वर्मा बैठा था।

सरी पाली में बृजेश कुमार सिंह की जगह विजेंद्र कन्नौजिया और सौरभ सिंह के स्थान पर त्रिवेंद्र सिंह को परीक्षा देनी थी। एसटीएफ पहुंचती इससे पहले ही परीक्षा स्थगित हो गई। पूछताछ में पता चला कि अयोध्या से गिरफ्तार रमेश ने 26 नवंबर को उत्तराखंड में हुई टीईटी में पप्पू आर्या के स्थान पर बैठा था। गिरफ्तार संदीप शिवपाल की जगह परीक्षा देने गया, जबकि रमेश उमानंद के स्थान पर बैठा था। वहीं, प्रयागराज में पकड़े गए अजय देव सिंह पूरे घटनाक्रम का अहम किरदार है। यहीं के धूमनगंज से गिरफ्तार रंजय और ललित ने बताया कि वाराणसी के सोनू कुमार ने बिहार से सॉल्वर बिट्टू सिंह और ललित को बुलाया था। बिट्टू सिंह फरार है। 

पेपर कैसे बाहर आया
एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर बाहर कैसे आया? पहले किसके पास पहुंचा, कितने में सौदा हुआ और कौन-कौन जिम्मेदार हैं। अभी तक जो पकड़े गए हैं, उनके पास पेपर कहां से आया ? दूसरे दिन भी कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। 

गिरफ्तार अभियुक्त अलग-अलग गैंग से जुड़े
एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि अभी तक गिरफ्तार अभियुक्त अलग-अलग गैंग से जुड़े हैं। इसमें से अधिकतर नए गैंग के सदस्य हैं जो बिहार से सॉल्वर लाकर दूसरे के स्थान पर बैठाते हैं। प्रयागराज से गिरफ्तार गिरोह का संचालन राजेंद्र कुमार पटेल, नीरज शुक्ला और चतुर्भुज सिंह करते हैं। यह पैसा लेकर पास कराने, पेपर आउट कराने और साल्वर बैठाने का काम करते हैं। केंद्रों पर भी सेटिंग करते हैं। परीक्षा के हिसाब से रेट तय हैं। इसमें सॉल्वर, पेपर आउट कराना, फोटो मिक्सिंग कर फर्जी आधार कार्ड बनवाना और फर्जी आईकार्ड तैयार करना शामिल है। 

लखनऊ का संतोष ही तो मुख्य सूत्रधार नहीं
कौशांबी से गिरफ्तार रौशन सिंह पटेल ने एसटीएफ को बताया कि उसने लखनऊ में प्रभात के जरिए संतोष कुमार से पांच लाख रुपये में पेपर खरीदा था। रौशन ने बताया कि वह प्रति अभ्यर्थी 80 हजार रुपये लेता। इसमें से 50 हजार प्रति अभ्यर्थी संतोष कुमार को दिया जाना था। एसटीएफ के  एक अधिकारी ने बताया कि लखनऊ से गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि पहली पाली का एक पेपर सेट किसी माध्यम से चार लाख रुपये में खरीदा था। जिसकी सात प्रति बनाई गई थीं। इन पेपर को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को 30 से 40 हजार रुपये में बेचा जाना था। गिरोह के लोगों ने लगभग 50 ग्राहक भी सेट कर लिए थे। एसटीएफ इसकी जांच कर रही है कि लखनऊ के गिरोह को संतोष ने ही तो पेपर मुहैया नहीं कराए थे? सवाल है कि आखिर संतोष के पास पेपर कैसे पहुंचा? कहीं संतोष ही तो सूत्रधार नहीं है?

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