पश्चिमी यूपी में आतंकियों के कई 'स्लीपिंग मॉड्यूल'
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आतंकी गतिविधियां संचालित करने के लिए वेस्ट यूपी आतंकवादियों के लिए सबसे मुफीद जगह बनती जा रही है। यहां के कई जिलों में काफी संख्या में आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल हैं।
दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख के खुलासे के बाद से यह बात और पुख्ता हो गई है। एजाज शेख ने खुलासा किया है कि देवबंद के पास उसके तीन और आतंकवादी रह रहे हैं।
इंटेलीजेंस ब्यूरो ने भी कुछ महीनों पहले प्रदेश सरकार को वेस्ट यूपी के बारे में अलर्ट किया था कि यहां आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं ये सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ सकते हैं। आईबी के इनपुट के अनुसार खतरनाक आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्म्द, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन व इंडियन मुजाहिदीन ने पश्चिम यूपी में अपनी गहरी पैठ बना ली है।
इनके कई स्लीपिंग मॉड्यूल मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा व रामपुर में सक्रिय हैं। अब तक कई आईएसआई एजेंट व आतंकवादी इन क्षेत्रों से गिरफ्तार हो चुके हैं।
राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी आतंकियों के पास
कुछ समय पहले ही पटियाला में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक शाहिद इकबाल भट्टी लंबे अरसे से सहारनपुर में रह रहा था। उसने तो यहां पर राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिए थे।
एक महीने पहले लश्कर के आतंकी अब्दुल सुभान के बेटे आलम को भी देवबंद के पास से ही दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। प्रमुख आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा की जड़ें भी वेस्ट यूपी में ही थीं। यह आतंकी हापुड़ के पिलखुवा कस्बे का रहने वाला था।
वर्ष 2009 से 2014 के बीच वेस्ट यूपी में काफी संख्या में जाली नोटों के साथ गिरफ्तार हुए। सुरक्षा एजेंसियों की माने तो यह पैसा पाकिस्तान से यहां भेजा जा रहा है।
दो-तीन पहले ही मेरठ में 24 लाख रुपये के जाली नोटों के साथ अख्तर हुसैन को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस व अन्य जांच एजेंसियां इससे पूछताछ कर रही हैं।
वेस्ट यूपी से पकड़े गए कुछ प्रमुख आतंकी व एजेंट
30 अप्रैल 2001-पाकिस्तान से प्रशिक्षित हरकत-उल-अंसार से जुडे़ आतंकी को हापुड़ के एक मदरसे से पकड़ा गया।
1 मई 2001-सहारनपुर से आईएसआई का एक एजेंट पकड़ा गया।
8 जनवरी 2002-गाजियाबाद में एक आईएसआई एजेंट को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
22 मार्च 2002-हापुड़ से लश्कर-ए-तैयबा के चार आतंकी पकड़े गए।
21 जून 2002-सुरक्षा बलों ने सेना के गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान को मुहैया कराने वाले एक आईएसआई एजेंट को पकड़ा।
9 जुलाई 2002- मुरादाबाद से हिज्बुल मुजाहिदीन के ताल्लुक रखने वाले पांच गिरफ्तार।
15 जुलाई 2002-मुजफ्फरनगर जिले से एक आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
14 मार्च 2003-मुजफ्फरनगर से जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी सज्जाद व इत्तफाकुल की गिरफ्तारी।
ये घटनाएं भी देखें-
18 अप्रैल 2004-मेरठ से रूबी बेगम नाम की आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी।
10 मार्च 2005-मेरठ से खलील हुसैन शाह नाम के आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी।
23 अगस्त 2005- लश्कर-ए-तैयबा के चीफ कोऑर्डिनेटर अबु रज्जाक मसूद का मुजफ्फरनगर कनेक्शन मिला था।
21 जून 2007-बिजनौर में काफी मात्रा में आरडीएक्स के हूजी के दो आतंकी गिरफ्तार।
12 दिसंबर 2008-सीआरपीएफ कैंप में आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए- तैयबा के आतंकी फहीम अंसारी की गिरफ्तारी।
10 जनवरी 2009-सहारनपुर से आईएसआई एजेंट आमिर अहमद उर्फ भूरा की गिरफ्तारी।
16 अगस्त 2014-मेरठ से संदिग्ध आईएसआई एजेंट आसिफ अली की गिरफ्तारी।
यूपी एटीएस भी करेगी पूछताछ
सहारनपुर में पकड़े गए आतंकी एजाज शेख से यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) भी पूछताछ करेगी। इसके लिए जल्द ही टीम दिल्ली रवाना हागी। इंडियन मुजाहिदीन के टेक्निकल एक्सपर्ट विंग के हेड एजाज से यूपी कनेक्शन को खंगाला जाएगा।
यूपी एटीएस की टीम यह पता लगाएगी कि उसके कितने साथी सूबे में पनाह लिए हुए हैं। एटीएस यह भी पता लगाएगी कि इसके तीन साथी जो देवबंद के पास रहते हैं वे कहां पर शरण लिए हुए हैं। ये आतंकी यूपी में कब से रह रहे हैं। इन्हें किन लोगों ने शरण दी है।
एटीएस सूत्रों के अनुसार एजाज शेख नेपाल बॉर्डर से दिल्ली जा रहा था। वह पिछले दिनों लखनऊ भी आया था। यहां से रोडवेज की बस से वह मुरादाबाद गया था। मुरादाबाद से वह सहारनपुर ट्रेन के जरिये गया था।
यहीं पर उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह सहारनपुर से दिल्ली जाने वाला था। लखनऊ, मुरादाबाद के बाद सहारनपुर में उसने क्या-क्या किया इसके बारे में भी एटीएस छानबीन करेगी।