फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Terror of elephants in katarniaghat in Bahraich.

Bahraich: गन्ने और गुड़ के लिए जंगल से बाहर निकल रहे हाथी, मचा रहे तबाही, ग्रामीणों में दहशत

Wed, 27 Nov 2024 06:30 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच Published by: ishwar ashish Updated Wed, 27 Nov 2024 06:30 PM IST
सार

बहराइच के कतर्नियाघाट जंगल में हाथी आबादी के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। जंगल में 300 से अधिक हाथी सक्रिय हैं। ग्रामीणों में दहशत है।

विज्ञापन
Terror of elephants in katarniaghat in Bahraich.
जंगलों से बाहर निकल रहे हाथी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बहराइच के कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में आये दिन जंगली हाथी आबादी व खेतों में पंहुचकर भारी तबाही मचाते हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों को भागकर जान बचाना पड़ता है। जंगली हाथी इतने आक्रामक होते हैं कि अगर इन हाथियों ने किसी को देख लिया तो उसे दौड़ाकर कुचल देते हैं। वहीं, वन विभाग के पास अभी तक हाथी के हमले रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं है।
विज्ञापन


एक संस्था के द्वारा गज मित्रों को नियुक्त कर ग्रामीणों को हाथियों के हमले से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग सात वन रेंजों में बंटा हुआ है जिसमें तीन वन रेंजों में हाथियों के हमले सबसे अधिक होते हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - झांसी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड पर बड़ी कार्रवाई, प्रधानाचार्य को हटाया, तीन निलंबित किए गए
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - अखिलेश यादव बोले- उपचुनाव में भाजपा के लोगों ने कम प्रशासन ने ज्यादा मेहनत की


कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में 250 से 300 तक हाथी होने का अनुमान है। इसमें से कुछ हाथी नेपाल के रायल बर्दिया पार्क से आये हैं। यह हाथी 40 से 60 के झुंड में रहते हैं और इनमें से कुछ टस्कर हाथी होते हैं जो काफी खतरनाक और आक्रामक होते हैं।

गन्ने की खेती कर रही हाथियों को आकर्षित
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के किनारे ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मात्रा में गन्ने की खेती होती है। हाथियों को गन्ना और गुड़ बहुत पसंद होता है जिससे हाथी जंगल से बाहर निकलकर आबादी की ओर रूख कर देते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पंहुचकर गन्ने की फसल के साथ साथ अन्य फसलों को तबाह कर देते है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग को हाथी रिजर्व घोषित होने के बाद हाथियों के हमले में चार ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। वहीं तीन हमलों में ग्रामीणों ने भाग कर जान बचाई है। हाथियों द्वारा दर्जनों घर गिराया जा चुका है।

जानें, कब-कब हुए हाथियों के हमले
- 4 जनवरी को जमुनिया गांव में फसल रौंदा तथा किसान गोविंद को दौड़ाया बाल-बाल बचा किसान।
- 12 फरवरी को बिछिया बाजार में हाथियों ने हमला कर कन्हैया का मकान गिराया।
-19 जनवरी को निषाद नगर में तीन मिट्टी के घर व एक टीनसेड का मकान किराया।
- 31 जनवरी को बनिया पुरवा गांव में 20 बीघा फसल रौंदी व 7 फूस के घर उजाड़े।
- 9 फरवरी को जंगल के किनारे नेवलापुर के पास सरसों की 20 बीघा फसल तहस-नहस कर दी।
- 24 फरवरी को वन रक्षक अजय सिंह पर हमला कर मरणासन्न दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed