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550 करोड़ का होगा मेट्रो के सिविल निर्माण का पहला टेंडर
रिषी मिश्रा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 07 Jun 2014 03:01 AM IST
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मेट्रो रेल परियोजना के सिविल निर्माण के लिए पहला टेंडर 550 करोड़ रुपये का होगा।
ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच आठ किलोमीटर के इस सेक्शन के लिए टेंडर करने का आदेश लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोशन की बोर्ड मीटिंग में शुक्रवार को दे दिया गया।
इसके अलावा मेट्रो रेल नेटवर्क के स्टेशनों और संपत्ति का अधिकतम व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए बिजनेस कंसलटेंट के लिए बिड आमंत्रण 10 जुलाई तक करने का फैसला किया गया।
किसानों से समझौते के आधार पर भूमि खरीदने के लिए कमेटी बना दी गई। इसके अलावा बोर्ड ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को बोर्ड का निदेशक और चेयरमैन भी मनोनीत कर दिया।
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एलएमआरसी की बोर्ड मीटिंग मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में आयोजित की गई।
प्रमुख सचिव आवास सदाकांत, कमिश्नर लखनऊ मंडल संजीव सरन, वित्त सचिच मुकेश मित्तल और सचिव आवास और एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक राजीव अग्रवाल बतौर बोर्ड मेंबर मौजूद रहे।
डीएमआरसी 2 महीने में पूरी करेगा टेंडर प्रक्रिया
मेट्रो के लिए सिविल निर्माण का टेंडर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन(डीएमआरसी) करेगा। बोर्ड ने तय किया है कि अगले दो महीने में ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
ताकि हर हाल में सितंबर-2014 में काम पूरा किया जा सके। पहले चरण में आठ किलोमीटर पर काम होगा। इसमें आठ स्टेशन बनाए जाएंगे।
फिलहाल तय किया गया है कि सितंबर-2017 में इस रूट पर मेट्रो रेल का संचालन शुरू हो जाएगा। इस तरह से काम कराने की सलाह एलएमआरसी के प्रधान सलाहकार ई. श्रीधरन ने दी थी।
10 जुलाई तक बिजनेस कंसलटेंट के लिए बिड आमंत्रण
एलएमआरसी की भूमि के अधिक से अधिक लाभकारी उपयोग और स्टेशनों को लखनऊ हेरिटेज की तहत डिजाइन कराने में बिजनेस कंसलटेंट काम आएंगे।
बोर्ड की ओर से कहा गया है कि 10 जुलाई तक प्री-बिड में आईं सात कंपनियों से बिड आमंत्रण किए जाएं। केंद्र सरकार की ओर से मेट्रो को लाभकारी बनाने का निर्देश दिया गया था।
यह कंसलटेंट करोड़ों रुपये की इस परियोजना में उपलब्ध भूमि के कामर्शियल इस्तेमाल में मदद करेगा। अगले तीस साल तक मेट्रो की प्रापर्टी का अधिकतम व्यवसायिक इस्तेमाल की सलाह ये एजेंसी देगी। मेट्रो रूट के पांच स्टेशनों को आइकॉनिक (अनूठा) बनाया जाना है।
किसानों से जमीन खरीदने के लिए बनाई कमेटी
किसानों ने जमीन खरीदने के लिए एलएमआरसी ने कमेटी गठित की है। इस कमेटी में मंडलायुक्त संजीव सरन अध्यक्ष होंगे।
उनके अलावा एमडी एलएमआरसी राजीव अग्रवाल, डीएम राजशेखर और एलएमआरसी के निदेशक वित्त भी शामिल किए जाएंगे।
मेट्रो के लिए सरोजनी नगर में आसाराम आश्रम की भूमि के अलावा कई अन्य जगह पर जमीन ली जाएगी। किसानों से ये भूमि बाजार भाव पर समझौता कर के क्रय की जानी है।
अमौसी से मुंशीपुलिया के 23 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो रेल संचालन और निर्माण के लिए एलएमआरसी को करीब 48 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
इसमें स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह की जमीन की जरूरत होगी। ये जमीन सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से ही ली जाएगी।
करीब 11 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण निजी क्षेत्र से करना पड़ेगा। स्थाई जरूरत के तौर पर नार्थ साउथ कारिडोर में स्टेशन के लिए सरकार से 1.83 हेक्टर और प्राइवेट से 2.02 हेक्टयेर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
रनिंग सेक्शन के लिए सरकार से 1.05 और प्राइवेट से 3.68 हेक्टयेर जमीन चाहिए होगी।
सब स्टेशन और अन्य जरूरतों के लिए सरकार से 37.8 हेक्टयेर जमीन ली जाएगी। कुल 48 हेक्टेयर जमीन इस कॉरिडोर के लिए एलएमआरसी लेगा।
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ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच आठ किलोमीटर के इस सेक्शन के लिए टेंडर करने का आदेश लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोशन की बोर्ड मीटिंग में शुक्रवार को दे दिया गया।
इसके अलावा मेट्रो रेल नेटवर्क के स्टेशनों और संपत्ति का अधिकतम व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए बिजनेस कंसलटेंट के लिए बिड आमंत्रण 10 जुलाई तक करने का फैसला किया गया।
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किसानों से समझौते के आधार पर भूमि खरीदने के लिए कमेटी बना दी गई। इसके अलावा बोर्ड ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को बोर्ड का निदेशक और चेयरमैन भी मनोनीत कर दिया।
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एलएमआरसी की बोर्ड मीटिंग मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में आयोजित की गई।
प्रमुख सचिव आवास सदाकांत, कमिश्नर लखनऊ मंडल संजीव सरन, वित्त सचिच मुकेश मित्तल और सचिव आवास और एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक राजीव अग्रवाल बतौर बोर्ड मेंबर मौजूद रहे।
डीएमआरसी 2 महीने में पूरी करेगा टेंडर प्रक्रिया
मेट्रो के लिए सिविल निर्माण का टेंडर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन(डीएमआरसी) करेगा। बोर्ड ने तय किया है कि अगले दो महीने में ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
ताकि हर हाल में सितंबर-2014 में काम पूरा किया जा सके। पहले चरण में आठ किलोमीटर पर काम होगा। इसमें आठ स्टेशन बनाए जाएंगे।
फिलहाल तय किया गया है कि सितंबर-2017 में इस रूट पर मेट्रो रेल का संचालन शुरू हो जाएगा। इस तरह से काम कराने की सलाह एलएमआरसी के प्रधान सलाहकार ई. श्रीधरन ने दी थी।
10 जुलाई तक बिजनेस कंसलटेंट के लिए बिड आमंत्रण
एलएमआरसी की भूमि के अधिक से अधिक लाभकारी उपयोग और स्टेशनों को लखनऊ हेरिटेज की तहत डिजाइन कराने में बिजनेस कंसलटेंट काम आएंगे।
बोर्ड की ओर से कहा गया है कि 10 जुलाई तक प्री-बिड में आईं सात कंपनियों से बिड आमंत्रण किए जाएं। केंद्र सरकार की ओर से मेट्रो को लाभकारी बनाने का निर्देश दिया गया था।
यह कंसलटेंट करोड़ों रुपये की इस परियोजना में उपलब्ध भूमि के कामर्शियल इस्तेमाल में मदद करेगा। अगले तीस साल तक मेट्रो की प्रापर्टी का अधिकतम व्यवसायिक इस्तेमाल की सलाह ये एजेंसी देगी। मेट्रो रूट के पांच स्टेशनों को आइकॉनिक (अनूठा) बनाया जाना है।
किसानों से जमीन खरीदने के लिए बनाई कमेटी
किसानों ने जमीन खरीदने के लिए एलएमआरसी ने कमेटी गठित की है। इस कमेटी में मंडलायुक्त संजीव सरन अध्यक्ष होंगे।
उनके अलावा एमडी एलएमआरसी राजीव अग्रवाल, डीएम राजशेखर और एलएमआरसी के निदेशक वित्त भी शामिल किए जाएंगे।
मेट्रो के लिए सरोजनी नगर में आसाराम आश्रम की भूमि के अलावा कई अन्य जगह पर जमीन ली जाएगी। किसानों से ये भूमि बाजार भाव पर समझौता कर के क्रय की जानी है।
अमौसी से मुंशीपुलिया के 23 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो रेल संचालन और निर्माण के लिए एलएमआरसी को करीब 48 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
इसमें स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह की जमीन की जरूरत होगी। ये जमीन सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से ही ली जाएगी।
करीब 11 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण निजी क्षेत्र से करना पड़ेगा। स्थाई जरूरत के तौर पर नार्थ साउथ कारिडोर में स्टेशन के लिए सरकार से 1.83 हेक्टर और प्राइवेट से 2.02 हेक्टयेर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
रनिंग सेक्शन के लिए सरकार से 1.05 और प्राइवेट से 3.68 हेक्टयेर जमीन चाहिए होगी।
सब स्टेशन और अन्य जरूरतों के लिए सरकार से 37.8 हेक्टयेर जमीन ली जाएगी। कुल 48 हेक्टेयर जमीन इस कॉरिडोर के लिए एलएमआरसी लेगा।