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Lucknow News: विवाद में फंसी संपत्तियों का बदलेगा किरायेदारी नियम, नगर निगम ने की तैयारी

Tue, 15 Apr 2025 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Apr 2025 01:48 AM IST
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Tenancy rules will change for properties caught in dispute, Municipal Corporation has made preparations
लखनऊ। नगर निगम नाम मात्र के किराये पर उठी संपत्तियों के किरायेदारी आवंटन नियमों में बदलाव करेगा। बदलाव के बाद नामांतरण शुल्क बढ़ाया जाएगा और करीब 10 साल से बंद नामांतरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा किराया भी बढ़ाया जाएगा। इसका असर नगर निगम के करीब ढाई हजार किरायेदारों पर पड़ेगा। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार हो गया है, जिसे 15 अप्रैल को नगर निगम सदन की बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाएगा।
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नगर निगम की शहर में करीब ढाई हजार आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियां किराये पर हैं। ज्यादातर में अब मूल आवंटी नहीं हैं। यहां ऐसे कब्जेदार हैं, जिनके नाम किरायेदारी ट्रांसफर नहीं हुई है। करीब छह दशक पहले आवंटित की गईं इन दुकानों का किराया सात साल पहले तक महज 20 रुपये, 30 रुपये और 50 रुपये महीना था। शहर के सबसे प्राइम लोकेशन पर दुकान होने के बाद भी उनका किराया नहीं बढ़ रहा था।
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कई बार निगम प्रशासन ने किराया बढ़ाने की कोशिश की, मगर दुकानदारों के विरोध के कारण वह लागू नहीं हो पाया। कई जगह किरायेदारों ने दुकान और मकान में अवैध निर्माण भी करा लिया है। नगर निगम न तो किराया वसूल पा रहा, न ही कब्जा खाली करा पा रहा है। अब एक नया प्रस्ताव बनाया गया है, ताकि नगर निगम की आय में बढ़ोतरी हो और और किरायेदारी का विवाद भी समाप्त हो सके।
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पहले भी किराया बढ़ाने का हो चुका है प्रयास

सात साल पहले शासन में काफी प्रयास के बाद व्यावसायिक संपत्ति कर निर्धारण नियमावली जारी होने के बाद निगम प्रशासन ने अपनी ओर से नया किराया तय किया। व्यापारियों ने विरोध किया तो कमेटी बनी और मोहन मार्केट का किराया नियमावली के तहत 10 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से लागू किया गया। चारबाग व अन्य बाजारों का भी किराया भी तय किया गया, लेकिन ज्यादातर आवंटियों ने किराया जमा ही नहीं किया।
आवंटन निरस्त होने के बाद भी खाली नहीं हुईं दुकानें
चारबाग की गुरुनानक मार्केट में 69 आवंटी ऐसे हैं, जो अवैध रूप से काबिज हैं। यह कई साल पहले ही जांच में सामने आया चुका है। शहर में कुल 109 आवंटियों को रेंट विभाग ने आवंटन निरस्त करने का नोटिस जारी किया। पुलिस को अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी लिखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। करीब दो साल पहले 44 किरायेदारों के आवंटन इसलिए निरस्त किए थे कि उन्होंने मकान का स्वरूप बदलकर होटल बना लिए हैं। आवंटन निरस्त होने के बाद भी अब तक कब्जा नहीं छोड़ा है, क्योंकि कानूनी विवाद चल रहा है।
नए प्रस्ताव में शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
(रेंट विभाग के तैयार किए प्रस्ताव के तहत)
- मूल आवंटी के स्थान पर उसके उत्तराधिकारी के नाम सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 15,000 रुपये व अन्य भवनों का 20000 रुपये।

- अमीनाबाद, कैसरबाग, चारबाग और हजरतगंज की दुकानों के मूल आवंटी के लिए उत्तराधिकारी के लिए नामांतरण शुल्क 60,000 रुपये और अन्य क्षेत्रों के लिए 40,000 रुपये।
- जिन संपत्तियों में लोग अवैध रूप से काबिज हैं, वहां सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 30,000 रुपये, मकान का 40,000 रुपये, जबकि ऐसे मामलों में अमीनाबाद, लालबाग, हजरतगंज, कैसरबाग व चारबाग की दुकान के लिए नामांतरण शुल्क 1,20,000 रुपये व अन्य क्षेत्र में 80,000 रुपये होगा।

नगर निगम की प्रमुख कॉलोनियां व बाजार
रिवर बैंक काॅलोनी, महानगर व महानगर विस्तार, गुरुनानक मार्केट चारबाग, बादशाह नगर, बालाकदर रोड, न्यू तुलसीदास मार्ग, कैसरबाग, नया बाजार लालबाग, गड़बड़झाला मार्केट अमीनाबाद, मोहन मार्केट, भोपाल हाउस, शहमीना रोड।
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