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शॉर्ट सप्लाई से डूबा दस हजार लोगों का सब्सिडी कोटा
Tue, 02 Apr 2019 01:32 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Tue, 02 Apr 2019 01:32 AM IST
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तेल कंपनियों की लापरवाही घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है। होली के पहले से शॉर्ट सप्लाई को दुरुस्त करने के कागजी दावे ही होते रहे और 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में दस हजार से अधिक उपभोक्ताओं का सब्सिडी कोटा डूब गया।
अब नए वित्तीय वर्ष में आवंटित सब्सिडी कोटे के आधार पर ही ऐसे उपभोक्ताओं की पुरानी बुकिंग अपडेट कर एलपीजी की सप्लाई होगी। दूसरी तरफ सप्लाई से जुड़ी तीनों तेल कंपनियों के केंद्रीयकृत स्तर पर संचालित बुकिंग सिस्टम के अपडेट न होने से बड़ी संख्या में एलपीजी उपभोक्ताओं की पुरानी बुकिंग भी अपग्रेड न हो पाने के कारण अटकी हुई है।
तेल कंपनियों के जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम में पुरानी बुकिंग का क्लीयरेंस न हो पाने को नई बुकिंग रिजेक्ट होने का कारण बता रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन सोमवार को गैस एजेंसियां तो खुली रहीं, लेकिन नए सब्सिडी कोटे के केंद्रीयकृत सिस्टम पर अपग्रेड किए जाने के कार्य के चलते नई बुकिंग के साथ सिलिंडरों की होम डिलीवरी भी नहीं हुई।
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इससे जरूरतमंद उपभोक्ताओं को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में शाम पांच बजे से केंद्रीय सिस्टम को अपग्रेड करते हुए जहां वित्तीय वर्ष 2018-19 के सब्सिडी कोटे के 12 सिलिंडरों को खत्म किया गया, वहीं नए वित्तीय वर्ष 2019-20 में आवंटित सब्सिडी कोटे के सिलिंडरों की फीडिंग का कार्य एक अप्रैल को देर शाम तक चला।
इसके चलते मार्च माह में बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को अब पुरानी बुकिंग सिस्टम पर अपडेट होने के बाद नए वित्तीय वर्ष में आवंटित सब्सिडी कोटे का सिलेंडर ही होम डिलीवरी में लेना होगा। जानकार बताते हैं कि बुकिंग से जुड़े आईवीआरएस सिस्टम के सॉफ्टवेयर में एजेंसीवार पुरानी बुकिंग का क्लीयरेंस न हो पाने के कारण ही 24 घंटे में स्वत: अपडेट होने वाली पुरानी बुकिंग का कार्य भी फिलहाल पूरा नहीं हुआ है।
सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों ने एजेंसी स्तर पर सिस्टम में फंसी पुरानी बुकिंग को जल्दी क्लीयर कराने का भरोसा दिलाया है। 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष के दौरान सप्लाई बैकलॉग के चलते वेटिंग में फंसी बुकिंग के 24 घंटे में स्वत: अपडेट हो जाने का दावा सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों ने किया था। मगर ऐसा हो न सका।
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अब नए वित्तीय वर्ष में आवंटित सब्सिडी कोटे के आधार पर ही ऐसे उपभोक्ताओं की पुरानी बुकिंग अपडेट कर एलपीजी की सप्लाई होगी। दूसरी तरफ सप्लाई से जुड़ी तीनों तेल कंपनियों के केंद्रीयकृत स्तर पर संचालित बुकिंग सिस्टम के अपडेट न होने से बड़ी संख्या में एलपीजी उपभोक्ताओं की पुरानी बुकिंग भी अपग्रेड न हो पाने के कारण अटकी हुई है।
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तेल कंपनियों के जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम में पुरानी बुकिंग का क्लीयरेंस न हो पाने को नई बुकिंग रिजेक्ट होने का कारण बता रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन सोमवार को गैस एजेंसियां तो खुली रहीं, लेकिन नए सब्सिडी कोटे के केंद्रीयकृत सिस्टम पर अपग्रेड किए जाने के कार्य के चलते नई बुकिंग के साथ सिलिंडरों की होम डिलीवरी भी नहीं हुई।
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इससे जरूरतमंद उपभोक्ताओं को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में शाम पांच बजे से केंद्रीय सिस्टम को अपग्रेड करते हुए जहां वित्तीय वर्ष 2018-19 के सब्सिडी कोटे के 12 सिलिंडरों को खत्म किया गया, वहीं नए वित्तीय वर्ष 2019-20 में आवंटित सब्सिडी कोटे के सिलिंडरों की फीडिंग का कार्य एक अप्रैल को देर शाम तक चला।
इसके चलते मार्च माह में बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को अब पुरानी बुकिंग सिस्टम पर अपडेट होने के बाद नए वित्तीय वर्ष में आवंटित सब्सिडी कोटे का सिलेंडर ही होम डिलीवरी में लेना होगा। जानकार बताते हैं कि बुकिंग से जुड़े आईवीआरएस सिस्टम के सॉफ्टवेयर में एजेंसीवार पुरानी बुकिंग का क्लीयरेंस न हो पाने के कारण ही 24 घंटे में स्वत: अपडेट होने वाली पुरानी बुकिंग का कार्य भी फिलहाल पूरा नहीं हुआ है।
सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों ने एजेंसी स्तर पर सिस्टम में फंसी पुरानी बुकिंग को जल्दी क्लीयर कराने का भरोसा दिलाया है। 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष के दौरान सप्लाई बैकलॉग के चलते वेटिंग में फंसी बुकिंग के 24 घंटे में स्वत: अपडेट हो जाने का दावा सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों ने किया था। मगर ऐसा हो न सका।