UP: 10 लाख छात्रों को झटका नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से करीब 10 लाख छात्र बाहर कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की जांच में भारी गड़बड़ियां पकड़ में आने पर यह फैसला किया गया। चूंकि, स्क्रूटनी अभी जारी है, इसलिए अपात्र ठहराए जाने वाले छात्रों की संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।
दशमोत्तर छात्रवृत्त्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में इस सत्र में 39 लाख 41 हजार 597 छात्रों के आवेदन जिलों से अग्रसारित किए गए थे।
शासन ने आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और विभिन्न कक्षाओं के रिजल्ट समेत कुल 31 बिंदुओं के आधार पर इन आवेदनों की जांच कराई थी। सोमवार को एनआईसी ने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इसके तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 3.5 लाख छात्र और उससे ऊपर की कक्षाओं में 26 लाख छात्रों के आवेदन ही सही पाए गए। मतलब, 9 लाख 91 हजार 597 आवेदनों को ‘संदिग्ध डाटा’ की श्रेणी में रखा गया है।
कोर्स छोड़ने वाले छात्रों की नहीं होगी शुल्क भरपाई
एनआईसी के सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध श्रेणी में रखे गए छात्रों के या तो दस्तावेज अवैध मिले या फिर विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले साल योजना का लाभ लेने के बावजूद उन्होंने इम्तहान ही नहीं दिया।
इसमें ऐसे छात्र भी अच्छी खासी संख्या में जिन्होंने पिछले साल जिस कोर्स में योजना का लाभ लिया है, तो उसे अधूरा छोड़कर इस साल दूसरे कोर्स में दाखिला ले लिया। नियमानुसार कोर्स अधूरा छोड़ने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति या शुल्क की भरपाई नहीं की जा सकती।
एनआईसी का कहना है कि जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि पिछले सत्र में लाभ लेने वाले छात्र ने परीक्षा दी या नहीं। परीक्षा दी तो पास हुआ कि नहीं।
अभी ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने अपना परीक्षाफल छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं किया है। इसलिए स्क्रूटनी पूरी नहीं हुई है। परीक्षाफल की भी जांच होने पर अपात्र छात्रों की संख्या 10 लाख से कहीं ज्यादा होगी।