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खजाने की खुदाई में इसरो भी कूदा, लगाई सेटेलाइट

Thu, 24 Oct 2013 09:11 AM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Thu, 24 Oct 2013 09:11 AM IST
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technology used in archaeological survey of india

डोंडिया खेडा में खजाने की तलाश में तकनीक के इस्तेमाल के बीच इसरो के सैटेलाइट का उपयोग किया गया।

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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने सैटेलाइट सर्वे के अलावा ग्राउंड लेवल पर भी मदद ली गई।

यह मदद करने का काम रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आरएसएसी), लखनऊ ने किया।

आरएसएसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, उन्नाव की ऐतिहासिक महत्व की साइट पर जियो- आर्कियोलॉजिकल स्टडी करने का काम सेंटर द्वारा किया जा रहा है।

पढ़ें-सपने की खुदाई में यूपी खोज रहा कुछ और

इनमें डोंडिया खेडा के अलावा संचानकोट-रामकोट और जलेसर जैसी साइट भी शामिल हैं। यह साइट केवल डोंडिया खेड़ा के तीन किमी के दायरे में हैं।

इस इलाके की सैटेलाइट मैपिंग के बाद टीम ने यहां आर्कियोलॉजिकल खुदाई का काम भी कराया। सबसे बड़ी सफलता संचानकोट में मिली।

खजाना तो यहां जरूर नहीं मिला लेकिन ऐतिहासिक महत्व के 12 सोने के सिक्के और तांबे की मुद्रा भी मिलीं।

जलेसर में करीब 7,000 मूर्तियां खुदाई में निकाली गईं। कुषाण, शुंग और गुप्ताकाल के डोडिंया खेड़ा में भी स्टडी के समय ऐतिहासिक महत्व की कुछ चीजें होने की बात भी सामने आई।
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यह जियोआर्कियोलॉजिकल स्टडी डोंडियाखेडा सहित उन्नाव में बाबा शोभन सरकार को सपना आने से पहले तक जारी थी।

सूत्रों के मुताबिक, इस स्टडी को जीएसआई के अधिकारियों के साथ भी साझा किया गया। इसके बाद जीएसआई ने अपनी रिपोर्ट तैयार की।

इस रिपोर्ट को आधार बनाकर एएसआई ने अपनी खुदाई शुरू कराई। निदेशक डॉ. पीएन शाह से इस मामले में संपर्क किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

..तो एक सप्ताह में बंद होगी खुदाई
आरएसएसी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि एएसआई यह खुदाई ट्रायल के नाम पर कर रही है। इसके लिए जरूरी लाइसेंस नहीं लिया गया है।

ऐसे में एक सप्ताह के अंदर यह खुदाई बंद खुद एएसआई कर देगा। इसके लिए वाटरलेवल नजदीक आने या फिर प्राकृतिक मिट्टी मिलने की बात कही जाएगी।

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