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Lucknow News: लविवि से जुड़े यूजी कॉलेजों के शिक्षक नहीं करा सकेंगे पीएचडी
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े स्नातक पाठ्यक्रम चलाने वाले कॉलेजों के शिक्षक अब पीएचडी कराने के लिए अर्ह नहीं माने जाएंगे। राजधानी के कृष्णा देवी गर्ल्स और शशि भूषण कॉलेज नई व्यवस्था की जद में आएंगे। बीते सप्ताह लविवि की विद्या परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया था, जिसमें संशोधित पीएचडी अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी गई।
लविवि से संबद्ध व सहयुक्त पीजी कॉलेजों को अब पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे कॉलेजों में उन्हीं विषय में रिसर्च हो सकती है, जिनमें पहले से स्नातक या परास्नातक पाठ्यक्रम चल रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी कॉलेज में कम से कम दो स्थायी शिक्षक संबंधित विषय में होने जरूरी हैं। इसके अलावा पुस्तकालय संसाधन और शोध सुविधाएं भी मानक अनुरूप होनी चाहिए। इन व्यवस्थाओं का सत्यापन विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता कुलपति या उनके नामित प्रतिनिधि करेंगे। समिति में संबंधित विभागाध्यक्ष और दो विषय विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
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शोध केंद्र के लिए करना होगा आवेदन
शोध केंद्र स्थापित करने के लिए कॉलेजों को संबंधित विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवेदन करना होगा। समिति की संस्तुति के बाद ही मंजूरी दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक दो वर्ष में शोध केंद्रों की समीक्षा भी की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
कोट्स
लुआक्टा से वार्ता के दौरान कुलपति ने आश्वासन दिया था कि सभी कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी करा सकेंगे। यदि विश्वविद्यालय अपने आश्वासन पर कायम नहीं रहता है तो लुआक्टा के नेतृत्व में शिक्षक धरना देने पर बाध्य होंगे।
- डॉ. मनोज पांडेय, अध्यक्ष, लुआक्टा
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लविवि से संबद्ध व सहयुक्त पीजी कॉलेजों को अब पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे कॉलेजों में उन्हीं विषय में रिसर्च हो सकती है, जिनमें पहले से स्नातक या परास्नातक पाठ्यक्रम चल रहे हैं।
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नई व्यवस्था के तहत किसी भी कॉलेज में कम से कम दो स्थायी शिक्षक संबंधित विषय में होने जरूरी हैं। इसके अलावा पुस्तकालय संसाधन और शोध सुविधाएं भी मानक अनुरूप होनी चाहिए। इन व्यवस्थाओं का सत्यापन विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता कुलपति या उनके नामित प्रतिनिधि करेंगे। समिति में संबंधित विभागाध्यक्ष और दो विषय विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
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शोध केंद्र के लिए करना होगा आवेदन
शोध केंद्र स्थापित करने के लिए कॉलेजों को संबंधित विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवेदन करना होगा। समिति की संस्तुति के बाद ही मंजूरी दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक दो वर्ष में शोध केंद्रों की समीक्षा भी की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
कोट्स
लुआक्टा से वार्ता के दौरान कुलपति ने आश्वासन दिया था कि सभी कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी करा सकेंगे। यदि विश्वविद्यालय अपने आश्वासन पर कायम नहीं रहता है तो लुआक्टा के नेतृत्व में शिक्षक धरना देने पर बाध्य होंगे।
- डॉ. मनोज पांडेय, अध्यक्ष, लुआक्टा