सेहत की बात: महिलाओं पर बेअसर हो रहीं टीबी की दवाएं, पांच साल में दोगुना हुआ दवा प्रतिरोधक टीबी का ग्राफ
केजीएमयू डॉट्स केंद्र की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसके अनुसार पांच साल में दवा प्रतिरोधक टीबी से पीड़ित महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है। 2020 में 279 थीं, लेकिन 2024 में ये आंकड़ा 568 तक पहुंच चुका है।
विस्तार
टीबी की दवाएं महिलाओं पर अब पहले जैसी असरदार नहीं रहीं। किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट शाॅर्ट्स-कोर्स (डाॅट्स) केंद्र के आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि बीते पांच वर्षों में महिलाओं में दवा प्रतिरोधक टीबी के मामले दोगुने हो गए हैं।
जागरुकता और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की वजह से साधारण टीबी के मामले महिला और पुरुष दोनों में तेजी से कम हो रहे हैं। दवा प्रतिरोधक टीबी के मामले पुरुषों में उतार-चढ़ाव वाले हैं, पर महिलाओं पर इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
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केजीएमयू में दवा प्रतिरोधक टीबी के प्रभावी इलाज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है। केंद्र पर रोग प्रतिरोधक और साधारण टीबी के मामले अलग-अलग दर्ज किए जाते हैं। केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2020 में रोग प्रतिरोधक टीबी के कुल मामले 622 थे। वहीं, वर्ष 2024 में इनकी संख्या 1165 पहुंच गई। केंद्र पर साधारण टीबी के आंकड़े पिछले तीन साल के ही माैजूद हैं। इनके मुताबिक वर्ष 2022 में साधारण टीबी के कुल मामले 1023 थे जो वर्ष 2024 में कम होकर 762 ही रह गए।
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समझें क्या है दवा प्रतिरोधक टीबी
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डाॅ. संतोष कुमार के मुताबिक आइसोनियाजिड, रिफैम्पिसिन, पाइराजिनामाइड, एथमब्यूटोल और स्ट्रेप्टोमाइसिन पहली पंक्ति की टीबी रोधी दवाएं हैं। अगर किसी मरीज में रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड समेत कोई अन्य दवा काम नहीं करती है, तो उसे दवा प्रतिरोधक टीबी कहा जाता है। ऐसे में दूसरी पंक्ति की दवाएं चलानी पड़ती हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
| वर्ष | पुरुष | महिला | कुल |
| 2020 | 343 | 279 | 622 |
| 2021 | 401 | 351 | 752 |
| 2022 | 536 | 485 | 1021 |
| 2023 | 668 | 506 | 1174 |
| 2024 | 597 | 568 | 1165 |
साधारण टीबी
| वर्ष | पुरुष | महिला | कुल |
| 2022 | 547 | 476 | 1023 |
| 2023 | 528 | 460 | 988 |
| 2024 | 379 | 383 | 762 |
महिलाओं में क्यों बढ़ रही यह बीमारी?
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फाॅर ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के संस्थापक प्रभारी प्राे. सूर्यकांत के अनुसार राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की वजह से टीबी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा रहा है। महिलाओं में दवा प्रतिरोधक और सामान्य, दोनों टीबी होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें कुपोषण, एनीमिया, कम उम्र में गर्भधारण, दो बच्चों के बीच कम अंतर, धूम्रपान, लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना, धूप में बिलकुल न रहना और तनाव प्रमुख कारण हैं।