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UP News: पान मसाला उद्योग से तीन गुना अधिक स्क्रैप में की गई टैक्स चोरी, आंकड़ा देख खुली रह गई अफसरों की आंखें

Sun, 29 Mar 2026 11:02 AM IST
Bhupendra Singh अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 29 Mar 2026 11:02 AM IST
सार

पान मसाला उद्योग से तीन गुना अधिक स्क्रैप में टैक्स चोरी की गई। आंकड़ा देखकर अफसरों की आंखें खुली रह गईं। पान मसाला का खौफ दिखाकर स्क्रैप में खेल कर दिया गया। आगे पढ़ें पूरी खबर... 

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Tax Evasion in UP Scrap Sector Is Three Times Higher Than in Pan Masala Industry
tax - फोटो : amar ujala

विस्तार

स्क्रैप सेक्टर में टैक्स चोरी का दायरा पान मसाला उद्योग की तुलना में तीन गुना से भी अधिक सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, लोहा, तांबा और स्क्रैप से जुड़े मामलों में करीब 20 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। जबकि, पान मसाला और तंबाकू सेक्टर में यह आंकड़ा लगभग 6000 करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश में भी स्थिति कुछ इसी तरह की है।

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जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या पान मसाला उद्योग में टैक्स चोरी का भय दिखाकर जांच टीमों का फोकस वहां केंद्रित किया गया। जबकि, दूसरी ओर स्क्रैप से भरे ट्रक हाईवे पर बिना रोक-टोक गुजरते रहे। इस दौरान संगठित तरीके से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया।

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मामलों में  15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में स्क्रैप सेक्टर से जुड़े 1976 मामलों में 16,806 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई। वहीं, पान मसाला और तंबाकू से जुड़े 212 मामलों में 5,794 करोड़ रुपये की चोरी सामने आई। वर्ष 2025-26 में इन मामलों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि स्क्रैप नेटवर्क में प्रदेश की कुछ बड़ी इस्पात कंपनियों की संलिप्तता हो सकती है।

स्क्रैप माफिया के बड़े सिंडिकेट का खुलासा

प्रदेश में जीएसटी चोरी के खिलाफ जारी कार्रवाई में स्क्रैप माफिया के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। हाल ही में यूपी एसटीएफ ने गाजियाबाद में 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी। 

नोएडा पुलिस ने भी फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले व्यापारियों को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क में करीब 2,600 फर्जी फर्मों के शामिल होने की बात सामने आई है। मेरठ और गाजियाबाद को केंद्र बनाकर चल रहे 500 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस रैकेट का भी भंडाफोड़ किया गया है।

ऐसे किया जा रहा खेल

स्क्रैप सेक्टर में टैक्स चोरी मुख्यतः फर्जी इनवॉइसिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए की जाती है। इसके लिए प्रवासी मजदूरों या आम लोगों के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर कागजी कंपनियां बनाई जाती हैं। ये फर्में आपस में केवल कागजों पर लेनदेन दिखाती हैं, जबकि वास्तविक रूप से कोई माल सप्लाई नहीं होता।

छोटे कबाड़ियों से नकद में स्क्रैप खरीदकर व्यापारी उस पर मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की कमी को फर्जी बिलों के जरिए पूरा करते हैं। एक ही स्क्रैप के बिलों को कई कंपनियों के बीच बार-बार घुमाया जाता है, जिससे नकली टर्नओवर बढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए बिना वास्तविक व्यापार के करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट या रिफंड हासिल कर लिया जाता है। इस पूरे मामले ने जीएसटी प्रणाली की निगरानी और प्रवर्तन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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