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Lucknow News: प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों से तत्काल टिकटों में सेंधमारी
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लखनऊ। 2500 रुपये में प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों को खरीदकर दलाल त्योहार पर कन्फर्म रेल व हवाई जहाज के टिकट हथियाने में जुटे हैं। वहीं, आरपीएफ की टीम, दलालों का डाटा बैंक तैयार कर कार्रवाई की तैयारी में लगी है।
डाटा बैंक में फर्जी आईडी, प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों आदि से टिकट बनाने वालों को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है। इतना ही नहीं पकड़े गए टिकट दलाल, प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों के नाम व उनकी कार्यक्षमता, कितने दलाल जमानत या जेल से छूटकर दोबारा दलाली का काम कर रहे हैं, किस सीजन में सर्वाधिक दलाली हो रही है, उनका पैटर्न आदि विवरण डाटा बैंक में दर्ज किया जाएगा।
आरपीएफ की टीम ने आलमबाग बाराबिरवा स्थित किंग-विंग टूर एंड ट्रेवेल कंपनी में टिकट दलाल को गिरफ्तार किया, उसके पास से रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर मिला। यह 40 सेकंड में 20 तत्काल टिकट बुक कर देता था।
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आरपीएफ क्राइम ब्रांच ने बताया कि प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का कारोबार मुंबई से चलता है। सॉफ्टवेयर मुंबई से ढाई से तीन हजार रुपये में लाकर यहां कारोबार किया जाता है।
टिकट दलाल स्लीपर सीट के टिकट पर 500 रुपये तक, एसी बोगियों के लिए 15 सौ से 18 सौ रुपये तक वसूले जाते हैं।
टिकट एजेंटों को नियमानुसार टिकट बुक करने में स्लीपर पर 20 रुपये प्रति टिकट, एसी टिकट पर 40 रुपये कमीशन मिलता है।
सॉफ्टवेयर तेज काम करता है। दलाल दस से बारह यात्रियों की डिटेल पहले से ही एक साथ फीड कर लेते हैं। जैसे ही तत्काल कोटा खुलता है, सॉफ्टवेयर के जरिये पेमेंट कर टिकट बुक हो जाता है।
उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से तत्काल टिकटों की दलाली करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ चेकिंग अभियान चला रही है। इतना ही नहीं दलालों की सूची बनाकर नजर रखी जा रही है।
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डाटा बैंक में फर्जी आईडी, प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों आदि से टिकट बनाने वालों को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है। इतना ही नहीं पकड़े गए टिकट दलाल, प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों के नाम व उनकी कार्यक्षमता, कितने दलाल जमानत या जेल से छूटकर दोबारा दलाली का काम कर रहे हैं, किस सीजन में सर्वाधिक दलाली हो रही है, उनका पैटर्न आदि विवरण डाटा बैंक में दर्ज किया जाएगा।
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आरपीएफ की टीम ने आलमबाग बाराबिरवा स्थित किंग-विंग टूर एंड ट्रेवेल कंपनी में टिकट दलाल को गिरफ्तार किया, उसके पास से रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर मिला। यह 40 सेकंड में 20 तत्काल टिकट बुक कर देता था।
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आरपीएफ क्राइम ब्रांच ने बताया कि प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का कारोबार मुंबई से चलता है। सॉफ्टवेयर मुंबई से ढाई से तीन हजार रुपये में लाकर यहां कारोबार किया जाता है।
टिकट दलाल स्लीपर सीट के टिकट पर 500 रुपये तक, एसी बोगियों के लिए 15 सौ से 18 सौ रुपये तक वसूले जाते हैं।
टिकट एजेंटों को नियमानुसार टिकट बुक करने में स्लीपर पर 20 रुपये प्रति टिकट, एसी टिकट पर 40 रुपये कमीशन मिलता है।
सॉफ्टवेयर तेज काम करता है। दलाल दस से बारह यात्रियों की डिटेल पहले से ही एक साथ फीड कर लेते हैं। जैसे ही तत्काल कोटा खुलता है, सॉफ्टवेयर के जरिये पेमेंट कर टिकट बुक हो जाता है।
उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से तत्काल टिकटों की दलाली करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ चेकिंग अभियान चला रही है। इतना ही नहीं दलालों की सूची बनाकर नजर रखी जा रही है।