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Lucknow News: बेकार को बेहतरीन बना रहीं हुनरबाज बेटियां
Tue, 25 Nov 2025 02:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 25 Nov 2025 02:48 AM IST
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बेकार को बेहतरीन बना रहीं हुनरबाज बेटियां
लखनऊ। जिन दिव्यांग किशोरियों को कभी अपने ही लोगों ने अपनाने से इनकार कर दिया था, वही आज अपनी कला से दुनिया को नई दृष्टि दे रही हैं। कूड़े-कबाड़ को खूबसूरत कलाकृतियों में बदलकर वे न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रही हैं कि प्रतिभा न परिचय की मोहताज होती है, न सीमाओं की। अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वही कचरा किसी की जिंदगी का उजाला बन सकता है।
जानकीपुरम विस्तार के सेक्टर-7 की श्रीमती नीता बहादुर रोड पर स्थित दृष्टि सामाजिक संस्था में 180 अनाथ दिव्यांग किशोरियां अपने सपनों को रंग देने का हुनर सीख रही हैं। संस्था की संचालक शालू सिंह बहादुर बताती हैं किसी की आंखें कमजोर हैं, कोई सुन नहीं पाती, तो किसी को बोलने में कठिनाई है लेकिन इनके हाथों की कला बोलती है और हर देखने वाला थम जाता है।
पुराने टायर इन किशोरियों के स्पर्श से रंगीन गार्डन पॉट बन जाते हैं। प्लास्टिक की बोतलों से वे ऐसी “वॉल हैंगिंग” तैयार करती हैं, जिन्हें देखते ही लोग दंग रह जाएं। खराब धातु, टूटे मोतियों और प्लास्टिक के टुकड़ों से ज्वैलरी बनाना इनके लिए किसी जादू से कम नहीं। हर कृति इनकी मेहनत, संघर्ष और रचनात्मकता की कहानी सुनाती है। (संवाद)
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प्रदर्शनी में बेबी रानी भी हो गईं प्रभावित
विश्व बाल दिवस के अवसर पर गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में लगी प्रदर्शनी ने इन किशोरियों की प्रसिद्धि को चार चांद लगा दिए। महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने इनके स्टॉल पर पहुंचकर कला की सराहना की। खराब पेपर और मिट्टी से बनी गणेशजी की पेंटिंग ने सभी का ध्यान खींचा था। 16 वर्षीय दृष्टिबाधित मीना की पेंटिंग ने दर्शकों को हैरत में डाल दिया था।
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जानकीपुरम विस्तार के सेक्टर-7 की श्रीमती नीता बहादुर रोड पर स्थित दृष्टि सामाजिक संस्था में 180 अनाथ दिव्यांग किशोरियां अपने सपनों को रंग देने का हुनर सीख रही हैं। संस्था की संचालक शालू सिंह बहादुर बताती हैं किसी की आंखें कमजोर हैं, कोई सुन नहीं पाती, तो किसी को बोलने में कठिनाई है लेकिन इनके हाथों की कला बोलती है और हर देखने वाला थम जाता है।
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पुराने टायर इन किशोरियों के स्पर्श से रंगीन गार्डन पॉट बन जाते हैं। प्लास्टिक की बोतलों से वे ऐसी “वॉल हैंगिंग” तैयार करती हैं, जिन्हें देखते ही लोग दंग रह जाएं। खराब धातु, टूटे मोतियों और प्लास्टिक के टुकड़ों से ज्वैलरी बनाना इनके लिए किसी जादू से कम नहीं। हर कृति इनकी मेहनत, संघर्ष और रचनात्मकता की कहानी सुनाती है। (संवाद)
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प्रदर्शनी में बेबी रानी भी हो गईं प्रभावित
विश्व बाल दिवस के अवसर पर गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में लगी प्रदर्शनी ने इन किशोरियों की प्रसिद्धि को चार चांद लगा दिए। महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने इनके स्टॉल पर पहुंचकर कला की सराहना की। खराब पेपर और मिट्टी से बनी गणेशजी की पेंटिंग ने सभी का ध्यान खींचा था। 16 वर्षीय दृष्टिबाधित मीना की पेंटिंग ने दर्शकों को हैरत में डाल दिया था।

बेकार को बेहतरीन बना रहीं हुनरबाज बेटियां