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Lucknow News: फर्जी लेटर पैड से मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के मामले में दी तहरीर
Fri, 23 May 2025 02:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 23 May 2025 02:19 AM IST
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लखनऊ। महानगर वार्ड के भाजपा पार्षद हरिश्चंद्र लोधी का फर्जी लेटर पैड और फर्जी हस्ताक्षर बनाकर गलत तरह से मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के मामले में जोनल अधिकारी जोन-3 अमरजीत सिंह ने अलीगंज थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
इंस्पेक्टर के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम को शिकायत मिली। जिस महिला का प्रमाणपत्र बनवाया जा रहा था, उसकी पहचान निर्मला शुक्ला के रूप में हुई है। उसकी मृत्यु 20 मई 2021 को पीजीआई में हुई थी। जबकि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महानगर सेक्टर-बी स्थित घर में मृत्यु दिखाकर आवेदन किया गया था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक कर्मचारी जोनल अधिकारी से ओटीपी लेने आया। दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारी को पता चला कि जिस रिपोर्ट के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया हो रही थी, उस पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे। कर अधीक्षक से पूछताछ करने पर उन्होंने भी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर से इनकार किया।
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संदेह गहराने पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तुरंत रोक दी गई और कर्मचारी को सेवा से हटा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यदि मृत्यु पीजीआई में हुई है तो प्रमाणपत्र वहीं से जारी होना चाहिए, नगर निगम से नहीं। इसके अलावा, यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि चार साल बाद अचानक प्रमाणपत्र बनवाने की जरूरत क्यों पड़ी। पुलिस अब पूरे मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत जांच में जुट गई है।
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इंस्पेक्टर के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम को शिकायत मिली। जिस महिला का प्रमाणपत्र बनवाया जा रहा था, उसकी पहचान निर्मला शुक्ला के रूप में हुई है। उसकी मृत्यु 20 मई 2021 को पीजीआई में हुई थी। जबकि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महानगर सेक्टर-बी स्थित घर में मृत्यु दिखाकर आवेदन किया गया था।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक कर्मचारी जोनल अधिकारी से ओटीपी लेने आया। दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारी को पता चला कि जिस रिपोर्ट के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया हो रही थी, उस पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे। कर अधीक्षक से पूछताछ करने पर उन्होंने भी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर से इनकार किया।
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संदेह गहराने पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तुरंत रोक दी गई और कर्मचारी को सेवा से हटा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यदि मृत्यु पीजीआई में हुई है तो प्रमाणपत्र वहीं से जारी होना चाहिए, नगर निगम से नहीं। इसके अलावा, यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि चार साल बाद अचानक प्रमाणपत्र बनवाने की जरूरत क्यों पड़ी। पुलिस अब पूरे मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत जांच में जुट गई है।