सर्दियों में हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक, ऐसे होगा बचाव
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बढ़ती उम्र और खराब जीवनशैली व खान पान की वजह से हमारी नसों में सिकुड़न और ब्लॉकेड आ जाते हैं। समय के साथ ये हमारे दिमाग की नसों में पहुंचकर थक्का जमाते हैं और वहां एक्यूट अटैक लाते हैं।
इन मामलों में छह घंटे के भीतर अगर ब्लॉकेड को खोल दिया जाए तो दिमाग को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। शनिवार शाम एसजीपीजीआई और चिकित्सा उपकरण बनाने वाली एक कंपनी की ओर से आयोजित एक वर्कशॉप में पीजीआई के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरवी फड़के ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों में ब्रेन स्ट्रोक होने पर उनकी आवाज अचानक बंद हो जाती है, चेहरा टेढ़ा हो जाता है और आधे शरीर में लकवा मार जाता है। ऐसा होने पर जरूरी है कि तुरंत स्ट्रोक की वजह बने थक्के को हटाया जाएगा।
इसके लिए एंजियोग्राफी करते हुए स्टेंट और ट्रेवो के जरिए इलाज दिया जा रहा है जो एसजीपीजीआई में करीब 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में यह खर्च दो से तीन गुना अधिक होता है।
साल में करवाएं ये जांच
डॉ. फड़के ने कहा कि सर्दियों में ब्रेन में थक्का जमने की आशंका रहती है, इसके लिए वरिष्ठ नागरिकों को सावधान रहने की जरूरत है। वे चाहें तो सालाना गर्दन की नसों की जांच करवाते रहें।
वहीं इसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक होने के छह घंटे के भीतर इलाज नहीं हो तो मरीज को ता उम्र के लिए लकवा हो सकता है।
राममनोहर लोहिया चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान के इमर्जेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव रतन सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले अधिकतर वरिष्ठ नागरिकों में मिल रहे हैं। इनसे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन और चेक-अप जरूरी है।