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राम मंदिर: मूर्ति के रंग को लेकर खत्म हुआ सस्पेंस, चंपत राय ने बताया कैसी और कितनी ऊंची होगी प्रतिमा

Fri, 05 Jan 2024 10:06 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 05 Jan 2024 10:06 PM IST
सार

तीन मूर्तिकारों ने तीन अलग-अलग मूर्तियां बनाई हैं। उसमें से एक मूर्ति को स्वीकार कर लिया गया है। तीनों मूर्तियां हमारे पास रहेंगी, सबका सम्मान होगा। पैर की अंगुली से लेकर ललाट तक रामलला की मूर्ति की कुल ऊंचाई 51 इंच होगी।

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suspense over the color of lord ram murti, Champat Rai told how and how high the statue will be
रामलला की मूर्तियों पर बोले चंपत राय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लंबे समय से इस बात की चर्चाएं चल रहीं थीं कि राम की मूर्ति कैसी होगी। शुक्रवार को इन चर्चाओं को विराम मिल गया। खुलासे के साथ रामलला की अचल मूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं मुहर लग गई। शुक्रवार को पूराबाजार में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि रामलला की अचल मूर्ति श्यामल रंग की होगी, वह पांच वर्ष के बालक का स्वरूप है। उन्होंने कार्यक्रम में रामलला की अचल मूर्ति की विशेषताएं भी लोगों को बताईं। 

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उन्होंने कहा कि तीन मूर्तिकारों ने तीन अलग-अलग मूर्तियां बनाई हैं। उसमें से एक मूर्ति को स्वीकार कर लिया गया है। तीनों मूर्तियां हमारे पास रहेंगी, सबका सम्मान होगा। पैर की अंगुली से लेकर ललाट तक रामलला की मूर्ति की कुल ऊंचाई 51 इंच होगी। इसके ऊपर मुकुट व आभामंडल होगा। प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 16 जनवरी से प्रारंभ हो जाएगा। 18 जनवरी की दोपहर में अपने आसन पर अचल मूर्ति को विराजित कर दिया जाएगा। यह अचल मूर्ति लगभग डेढ़ टन की और श्यामल पत्थर की है।
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108 कलशों में अयोध्या पहुंचा संगम का जल
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए शुक्रवार को प्रयागराज के संगम का जल अयोध्या पहुंचा है। काशी प्रांत विश्व हिंदू परिषद की ओर से यह जल अयोध्या लाया गया है। विहिप के कार्यकर्ताओं ने 108 कलशों में भरे जल को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपा है। विहिप के भोलेंद्र ने बताया कि वेदमंत्रों से अभिमंत्रित किए जाने के बाद संगम के जल से भरे 108 कलश अयोध्या आए हैं। इस जल का प्रयोग रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में किया जाएगा। 
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एयरपोर्ट में अयोध्या की विरासत को सहेजने की झलक
नवनिर्मित महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अयोध्या के विरासत को सहेजने की झलक मिलती है। मंदिर का गुंबद, रामायण के प्रसंगों के चित्र और श्री राम के धनुष बाण के प्रतीक यहां दिखते हैं। पीएम मोदी की अगवानी में टर्मिनल बिल्डिंग में पहुंचे लोग यहां का दृश्य देख अपने को वाह बोलने से नहीं रोक सके।

एयरपोर्ट मंदिर मॉडल पर बना है। अंदर-बाहर अयोध्या की विरासत के दर्शन होते हैं। डिजाइन राज्य संस्कृति और विरासत को चित्रित करने वाली दिखती है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि हवाई अड्डे का डिजाइन, यात्रियों को प्रदेश और अयोध्या की संस्कृति से परिचित कराने वाला है।


जानकारों का कहना है कि एयरपोर्ट मंदिर वास्तु कला की नागर शैली में दिखता है। राम मंदिर के स्थापत्य शैली को भी अपनाया गया है। टर्मिनल बिलिंडग के भित्ति चित्रों, कलाकृतियों में रामायण के प्रसंग आकर्षित करते हैं। शिखर पर मंदिर का गुंबद है। पीएम मोदी की अगवानी में पहुंचे भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह कहते हैं कि हवाई अड्डे में प्रथम दृष्टया अयोध्या की आध्यात्मिक, धार्मिक व ऐतिहासिकता दिखती है। प्रवेश द्वार के पास ही भगवान श्री राम के चित्र हैं। बाहर से धनुष और बाण भी दिखता है। राघवेंद्र नरायन पांडेय बताते हैं कि 50 हजार वर्ग फुट की इमारत सात खंभों पर टिकी है। पूछने पर वहां बताया गया कि यह रामायण के साथ कांडों का प्रतीक हैं। ऐसी कई अन्य विशेषताएं भी बताई गई।

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