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155 करोड़ की उपकरण खरीद में भी फंसे निलंबित महाप्रबंधक
Sun, 08 Dec 2019 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 08 Dec 2019 03:46 AM IST
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- फोटो : ANI
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फर्जी भुगतान एवं भ्रष्टों को बचाने में निलंबित हुए पराग के महाप्रबंधक (प्रशासन) हंसवीर वर्मा 155 करोड़ रुपये की उपकरण खरीद में भी फंसे हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग मुख्य सचिव को इस खरीद की विजिलेंस जांच का निर्देश दे चुका है।
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दरअसल, लखनऊ में जितनी दुग्ध समितियां नहीं हैं, उससे अधिक उपकरण खरीदने की मांग महाप्रबंधक ने पीसीडीएफ को भेजी थी, जिससे उनकी खरीद की गई। दीगर है कि उपकरण की डिमांड भेजने में पांच अन्य दुग्ध संघ भी शामिल थे, जिनके महाप्रबंधक के खिलाफ भी जांच चल रही है।
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समितियां 6835, डीपीएमयू खरीदे 12,859
आयोग के निदेशक कौशल कुमार ने तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार को पत्र भेजकर उपकरण खरीद की विजिलेंस से जांच कराने के निर्देश दिए थे। पत्र में उल्लेख किया था कि पीसीडीएफ की ओर से 6835 दुग्ध समितियों के लिए 12,859 डाटा प्र्रोसेसर मिल्क कलेक्शन यूनिट (डीपीएमसीयू) खरीदी गई। आवश्यकता से 6024 अधिक खरीदे गए डीपीएमसीयू की कीमत 68 करोड़ रुपये है। इसी प्रकार 87 करोड़ रुपये के 750 बल्क मिल्क कूलर (बीएमसी) खरीदे गए।
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लखनऊ में सिर्फ 74 डीपीएमसीयू की रिपोर्ट
लखनऊ दुग्ध संघ की वर्तमान में कुल 550 समितियां हैं, जबकि पूर्व मे 722 डीपीएमसीयू को समितियों में लगाने के लिए सप्लाई ली गई। इनमें से 439 डीपीएमसीयू को लगाया गया, जिसमें से 74 ही पीसीडीएफ को रिपोर्ट कर रही हैं। इस पर प्रबंध निदेशक बीएल मीण ने निलंबित महाप्रबंधक को नोटिस जारी किया था।