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सुना है क्या: "छोटे माननीय ने पैर पर मारी कुल्हाड़ी", "नेताजी का प्रबंधन कौशल", "कमिश्नरेट पर कई की नजर"
Thu, 08 Oct 2026 12:11 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:11 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश में चुनाव की आहट होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी माननीय अपने-अपने जुगाड़ में लगे हुए हैं। कोई अपनी गलती पर पछता रहा है तो कोई अपने रसूख को बचाने में कामयाब हो गया है। पढ़ें, प्रदेश की प्रमुख खबरें:
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में चुनाव की आहट होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी माननीय अपने-अपने जुगाड़ में लगे हुए हैं। कोई अपनी गलती पर पछता रहा है तो कोई अपने रसूख को बचाने में कामयाब हो गया है। वहीं, कमिश्नरेट पर अफसरों की नजर टिकी हुई है। पढ़ें, प्रदेश की प्रमुख खबरें:
छोटे माननीय ने पैर पर मारी कुल्हाड़ी
विपक्षी दल के एक छोटे माननीय की अपने दल के नेताओं के साथ उठा-बैठक कम है। वह पश्चिम में राजनीति करने वाले दूसरे दल के बड़े माननीय के साथ ज्यादा देखे जाते हैं। यह बड़े माननीय अक्सर ही उस दल के शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते हैं जिससे छोटे माननीय ताल्लुक रखते हैं। छोटे माननीय के साथ वाले माननीय बताते हैं कि अगर छोटे माननीय वफादारी कायम रखते तो पार्टी किसी और के बजाय उनका ही कद बढ़ाती। इसे कहते हैं... अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारना।
नेताजी का प्रबंधन कौशल
भगवा दल में मीडिया समेत कई टीम की घोषणा हुई है। इसमें कई नए-पुराने लोगों को एडजस्ट किया गया है। कई लोग तो इस बात को लेकर बदहवास थे कि इस बार उनकी पुर्ननियुक्ति होगी या बाहर हो जाएंगे लेकिन चुनावी साल को देखते हुए सभी का समायोजन हो गया। लिहाजा ऐसे सभी लोगों के वाहन पर पार्टी ध्वज बरकरार रहा, जिनके टीम से बाहर होने के संकेत थे। अब एक नेताजी इसका श्रेय लेते फिर रहे हैं कि उन्होंने नेतृत्व से मैनेज करके ऐसे लोगों की कुर्सी बचा ली है। ये वही नेताजी हैं, जिन्होंने अपने प्रबंधन कौशल के बल पर दोबारा कुर्सी पाई है और हाल में एमएलसी उम्मीदवारों की सूची में शामिल एक उम्मीदवार को टिकट दिलाने के बदले मैनेजमेंट करने का आरोप लगा है।
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कमिश्नरेट पर कई की नजर
प्रदेश के एक कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त का वक्त काफी लंबा गुजर चुका है। अब वहां बदलाव की बारी है। इसलिए कुछ वरिष्ठ अफसरों की नजर उस कमिश्नरेट पर है। हर तरह से जद्दोजहद जारी है ताकि कमान मिल सके। ये प्रयास कई महीने से चल रहे हैं लेकिन तबादले की सूची आती है और वहां के सीपी का नाम उसमें नहीं होता। नजर गड़ाए अफसर निराश हो जाते हैं। अब देखना होगा कि ये कुर्सी कब खाली होती है और किसकी तपस्या सफल होती है।
आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाट्सएप करें।
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छोटे माननीय ने पैर पर मारी कुल्हाड़ी
विपक्षी दल के एक छोटे माननीय की अपने दल के नेताओं के साथ उठा-बैठक कम है। वह पश्चिम में राजनीति करने वाले दूसरे दल के बड़े माननीय के साथ ज्यादा देखे जाते हैं। यह बड़े माननीय अक्सर ही उस दल के शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते हैं जिससे छोटे माननीय ताल्लुक रखते हैं। छोटे माननीय के साथ वाले माननीय बताते हैं कि अगर छोटे माननीय वफादारी कायम रखते तो पार्टी किसी और के बजाय उनका ही कद बढ़ाती। इसे कहते हैं... अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारना।
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नेताजी का प्रबंधन कौशल
भगवा दल में मीडिया समेत कई टीम की घोषणा हुई है। इसमें कई नए-पुराने लोगों को एडजस्ट किया गया है। कई लोग तो इस बात को लेकर बदहवास थे कि इस बार उनकी पुर्ननियुक्ति होगी या बाहर हो जाएंगे लेकिन चुनावी साल को देखते हुए सभी का समायोजन हो गया। लिहाजा ऐसे सभी लोगों के वाहन पर पार्टी ध्वज बरकरार रहा, जिनके टीम से बाहर होने के संकेत थे। अब एक नेताजी इसका श्रेय लेते फिर रहे हैं कि उन्होंने नेतृत्व से मैनेज करके ऐसे लोगों की कुर्सी बचा ली है। ये वही नेताजी हैं, जिन्होंने अपने प्रबंधन कौशल के बल पर दोबारा कुर्सी पाई है और हाल में एमएलसी उम्मीदवारों की सूची में शामिल एक उम्मीदवार को टिकट दिलाने के बदले मैनेजमेंट करने का आरोप लगा है।
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कमिश्नरेट पर कई की नजर
प्रदेश के एक कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त का वक्त काफी लंबा गुजर चुका है। अब वहां बदलाव की बारी है। इसलिए कुछ वरिष्ठ अफसरों की नजर उस कमिश्नरेट पर है। हर तरह से जद्दोजहद जारी है ताकि कमान मिल सके। ये प्रयास कई महीने से चल रहे हैं लेकिन तबादले की सूची आती है और वहां के सीपी का नाम उसमें नहीं होता। नजर गड़ाए अफसर निराश हो जाते हैं। अब देखना होगा कि ये कुर्सी कब खाली होती है और किसकी तपस्या सफल होती है।
आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाट्सएप करें।