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सुना है क्या: प्रचार होना ही चाहिए, साथ ही 'साहब को पसंद हैं गुलदस्ते और सॉफ्टवेयर का चक्कर' के किस्से

Sun, 21 Jun 2026 12:24 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 21 Jun 2026 12:24 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya Publicity must along with boss fondness for bouquets and software business
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'मुखिया हैं तो प्रचार होना ही चाहिए' की कहानी। इसके अलावा 'साहब को पसंद हैं गुलदस्ते' और 'सॉफ्टवेयर का चक्कर' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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मुखिया हैं तो प्रचार होना ही चाहिए

खेती-बाड़ी से जुड़े एक मुखिया कम प्रचार होने से परेशान हैं। उनका आदेश है कि वह कोई काम करें या न करें लेकिन प्रचार भरपूर चाहिए। वह कोई भी आदेश जारी करें तो उसका भरपूर बखान होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उनका गुस्सा आसमान पर पहुंच जाता है। दो दिन पहले उन्होंने अपने उस कार्मिक की क्लास ली है, जिसे प्रचार का जिम्मा सौंपा था। कार्मिक की गलती सिर्फ यह थी कि मुखिया ने टेलीफोन पर अफसरों को जो निर्देश दिए थे, उनका प्रचार नहीं हो पाया।

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साहब को पसंद हैं गुलदस्ते

प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में तबादला सत्र खत्म हुए एक पखवाड़ा बीतने को है लेकिन अभी भी स्वागत और मिठाइयों का दौर थम नहीं रहा है। स्कूल बंद चल रहे हैं तो इसकी गति भी धीमी नहीं हो पा रही है। कुछ तैनाती पाने और कुछ तैनाती न पाने वाले भी लगे हुए हैं। इसमें एक बड़े साहब खासे चर्चा में हैं। साहब को गुलदस्ते बहुत पसंद हैं। वह हर आने वाले से बहुत ही गर्मजोशी से गुलदस्ते ले रहे हैं और फोटो भी खिंचवा रहे हैं। हालांकि, उनके एक पुराने परिचित अधिकारी ने कहा कि अभी फोटो खिंचवा लो, आगे पता नहीं क्या होगा।

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सॉफ्टवेयर का चक्कर

टैबलेट की खरीदारी में सॉफ्टवेयर की एक शर्त आड़े आ गई। सिक्योरिटी को लेकर सॉफ्टवेयर इनेबेल्ड टैबलेट का फैसला लिया गया। इस फैसले से चुनिंदा कंपनी को ही हजारों करोड़ के आर्डर मिलने के अंदेशे पर खरीद वाले विभाग के अफसरों ने आपत्ति की। कुछ का तर्क था कि जैसे लैपटॉप में सिक्योरिटी सिस्टम होता है और यूजर कोई भी सिक्योर साफ्टवेयर लेने के लिए स्वतंत्र होता है, वैसा ही सिस्टम टैबलेट में भी किया जाए। चर्चा है कि इस मामले में विवाद बढ़ गया, तनातनी हो गई। शिकायतें हो गईं। इस मामले में आखिरकार अफसरों की नहीं चली और बताते हैं कि ऑर्डर हो चुके हैं।

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