यह टोटका ही सही लेकिन अब तक कारगर है। आजादी के बाद से ही सुल्तानपुर जिला की सदर (जयसिंहपुर) विधानसभा क्षेत्र से जिस दल के प्रत्याशी ने चुनाव जीता सूबे में सीएम उसी के दल का बना। विधानसभा के चुनावी आंकड़े इसकी गवाही भी देते हैं। शायद यही वजह है कि सीएम ने अपनी रैली की शुरुआत इसी विधानसभा क्षेत्र से की। नतीजे आ चुके हैं और इस सीट से बीजेपी के सीताराम वर्मा की जीत हुई।
यूपी में लकी सीट का टोटका कायम, यहां जीतने वाली पार्टी की बनती है सरकार
चुनावी आंकड़ों की मानें तो 1977 के पहले कांग्रेस का ही तकरीबन एकछत्र राज रहा है। 1977 में जनता पार्टी की सरकार आई तो यह टोटका जिले की तब जयसिंहपुर के नाम से रहे सदर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला।
1977 में कांग्रेस प्रत्याशी शिवकुमार को हराकर जनता पार्टी के मकबूल हसन खान विधायक बने तो सूबे के मुख्यमंत्री जनता पार्टी के ही राम नरेश यादव बने। इसके बाद से अब तक के हुए विधानसभा के चुनावों में यह टोटका खरा उतरता आ रहा है।
बीच के कुछ चुनावों में समझौते की वजह से सूबे में मुख्यमंत्री आपस में बदले लेकिन जिस दल का विधायक इस क्षेत्र से चुना गया शुरुआत में मुख्यमंत्री उसी दल का बना। शायद यही वजह है कि अखिलेश यादव ने इस चुनाव में अपनी रैली की शुरुआत 24 जनवरी को सदर विधानसभा क्षेत्र से ही की थी। अपनी रैली में उन्होंने इशारे में इसका जिक्र भी किया था। यह टोटका सार्वजनिक होने के बाद तकरीबन सभी दलों की निगाहें इस विधानसभा क्षेत्र पर टिक गई थीं।
वर्ष विधायक पार्टी मुख्यमंत्री
1977- मकबूल हसन जनता पार्टी राम नरेश यादव
1980- देवेंद्र पांडेय कांग्रेस वीपी सिंह
1985- देवेंद्र पांडेय कांग्रेस एनडी तिवारी
1989- सूर्यभान सिंह जनतादल मुुलायम सिंह यादव
1991- अर्जुन सिंह भाजपा कल्याण सिंह
1993- अब्दुल रईस सपा मुलायम सिंह यादव
1996- रामरतन यादव बसपा मायावती
2002- ओपी सिंह बसपा मायावती
2007- ओपी सिंह बसपा मायावती
2012- अरुण वर्मा सपा अखिलेश यादव