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यूपी: चीनी मिलों व डिस्टलरी से जुड़ी परियोजनाओं को सुविधाएं देने का रास्ता साफ, वित्त विभाग की आपत्ति खारिज
Tue, 30 Nov 2021 08:56 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 30 Nov 2021 08:56 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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शासन ने चीनी मिलों व डिस्टलरी (एथेनाल) से जुड़ी परियोजनाओं को विशेष सुविधाएं व वित्तीय रियायतें देने में आ रही अड़चन दूर कर दी है। इंपावर्ड कमेटी ने वित्त विभाग के मत से अलग औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 की नियमावली के अंतर्गत ही लाभ देने पर सहमति दे दी है। इस संबंध में जल्दी ही दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी है।
सूत्रों ने बताया कि हरदोई में पूर्व से स्थापित डीसीएस श्रीराम हरियावां चीनी मिल के विस्तारीकरण व इथेनाल उत्पादन की विविधीकरण परियोजना के लिए 361 करोड़ व 190 करोड़ रुपये पूंजी निवेश के दो प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित इंपावर्ड समिति के समक्ष पेश किए गए थे।
समिति में शामिल वित्त विभाग के अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर नीतिगत सवाल उठाते हुए कार्यवाही स्थगित करने का मत दिया। अधिकारी का कहना था कि चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा वर्ष 2018 में नई नीति लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया जिसे फिलहाल स्थगित रखा गया है।
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चूंकि, चीनी उद्योग के लिए पूर्व में अलग से प्रोत्साहन नीति रही है, इसलिए चीनी उद्योग तथा आसवानी इकाइयों को औद्योगिक विकास विभाग की नीति से आच्छादित करने का औचित्य नहीं है। इसके बाद मुख्य सचिव ने प्रशासनिक विभाग को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग से विचार-विमर्श कर प्रकरण में नए सिरे से स्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर कमेटी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
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सूत्रों ने बताया कि हरदोई में पूर्व से स्थापित डीसीएस श्रीराम हरियावां चीनी मिल के विस्तारीकरण व इथेनाल उत्पादन की विविधीकरण परियोजना के लिए 361 करोड़ व 190 करोड़ रुपये पूंजी निवेश के दो प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित इंपावर्ड समिति के समक्ष पेश किए गए थे।
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समिति में शामिल वित्त विभाग के अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर नीतिगत सवाल उठाते हुए कार्यवाही स्थगित करने का मत दिया। अधिकारी का कहना था कि चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा वर्ष 2018 में नई नीति लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया जिसे फिलहाल स्थगित रखा गया है।
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चूंकि, चीनी उद्योग के लिए पूर्व में अलग से प्रोत्साहन नीति रही है, इसलिए चीनी उद्योग तथा आसवानी इकाइयों को औद्योगिक विकास विभाग की नीति से आच्छादित करने का औचित्य नहीं है। इसके बाद मुख्य सचिव ने प्रशासनिक विभाग को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग से विचार-विमर्श कर प्रकरण में नए सिरे से स्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर कमेटी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रशासकीय विभाग ने विचार-विमर्श कर तीन सूत्रीय प्रस्ताव तैयार कर इंपावर्ड कमेटी को उपलब्ध कराया था। लेकिन, इंपावर्ड कमेटी की बैठक में प्रशासनिक विभाग ने कुछ नए तथ्य सामने आने का हवाला देते हुए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 की नियमावली के अंतर्गत लाभ देने का ही प्रस्ताव किया, जिस पर अन्य विभागों ने भी सहमति जताई। इसके बाद इंपावर्ड कमेटी ने भी प्रशासकीय विभाग के तर्क को स्वीकार करते हुए सुविधाएं व लाभ देने संबंधी प्रस्ताव व प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है।
इस तरह होगी प्रस्ताव पर कार्रवाई
इथेनाल व चीनी उत्पादन से संबंधित औद्योगिक निवेश व रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 की क्रियान्वयन नियमावली के अतंर्गत सभी प्रस्ताव निवेश मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्राप्त किए जाएंगे। इसके बाद नोडल संस्था इथेनाल व चीनी संबंधित प्रस्ताव प्रशासकीय विभाग को अग्रसारित किया जाएगा। प्रशासकीय विभाग परियोजना से जुड़े आवेदन का परीक्षण कर दो सप्ताह में लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने की संस्तुति पिकप को कर दी जाएगी। नोडल संस्था नियमानुसार प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई कराएगी।
इस तरह होगी प्रस्ताव पर कार्रवाई
इथेनाल व चीनी उत्पादन से संबंधित औद्योगिक निवेश व रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 की क्रियान्वयन नियमावली के अतंर्गत सभी प्रस्ताव निवेश मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्राप्त किए जाएंगे। इसके बाद नोडल संस्था इथेनाल व चीनी संबंधित प्रस्ताव प्रशासकीय विभाग को अग्रसारित किया जाएगा। प्रशासकीय विभाग परियोजना से जुड़े आवेदन का परीक्षण कर दो सप्ताह में लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने की संस्तुति पिकप को कर दी जाएगी। नोडल संस्था नियमानुसार प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई कराएगी।