लखनऊ के महिला शरणालय से संवासिनी गायब, संरक्षण केंद्रों की पड़ताल में खुलासा, होगी मजिस्ट्रेटी जांच
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देवरिया के मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह में बालिकाओं से देह व्यापार की शर्मसार करने वाली घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर लखनऊ में भी अधिकारी चेते। जिलाधिकारी ने सोमवार देर रात अलग-अलग टीमें गठित कर चार सरकारी व 13 एनजीओ स्तर पर संचालित बालिका संरक्षण केंद्रों की औचक पड़ताल कराई।
जिला प्रशासन, पुलिस, जिला प्रोबेशन अधिकारी व महिला कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारियों की टीमों ने शहरी व ग्रामीण इलाकों में चल रहे इन संरक्षण केंद्रों को देर रात तक खंगाला। इस दौरान प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय महिला संरक्षणालय में रहने वाली संवासिनी के 29 जुलाई को लापता होने का मामला सामने आया। संरक्षण गृह की संचालिका ने लापरवाही बरतते हुए इस मामले में सिर्फ पुलिस में शिकायत दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली।
उसने न तो जिला प्रशासन और न ही बाल कल्याण समिति को जानकारी दी। ऐसे में अब तक गायब हुई संवासिनी का कोई सुराग नहीं लग सका है। राजकीय महिला संरक्षाणालय में रहने वाली अन्य संवासनियों ने भी बिना बात मारने-पीटने की शिकायत के साथ घटिया खाना दिए जाने की बात भी एसीएम प्रथम प्रफुल्ल त्रिपाठी के समक्ष दर्ज कराई। एसीएम की मौखिक रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश भी देर रात जारी कर दिए।
जांच टीम ने राजकीय बाल गृह में मौजूद अन्य संवासिनियों से भी पूछताछ कर उन कारणों को खोजने की कोशिश की, जिससे एक संवासिनी को भागना पड़ा था। इस दौरान संरक्षण गृह की संचालिका आरती सिंह टीम के कई प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकी। पड़ताल में यहां रहने वाली संवासिनियों को जगह की कमी से होने वाली परेशानी भी सामने आई। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि राजकीय महिला शरणालय में 59 संवासिनियां तथा शिशु गृह में 54 बच्चे मिले। रिकॉर्ड में इनका नाम, उम्र इत्यादि दुरुस्त पाई गई।
आज सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
टीमों ने देर रात मोहान रोड बालिका गृह समेत कुछ एनजीओ की ओर से शहर में चलाए जा रहे बालिका गृहों की भी पड़ताल की। अधिकतर जगह लड़कियों ने खाना ठीक से न दिए जाने, साफ सफाई की व्यवस्था चौपट होने, शौचालय इत्यादि गंदे रहने, बिस्तरों की कमी से होने वाली परेशानी के बारे में बताया।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि सभी जांच टीमों से मंगलवार सुबह विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर देने को कहा गया है। इसके आधार पर जिन सरकारी व एनजीओ संचालित बालिका गृहों में गड़बड़ी उजागर होगी, उनके संचालकों के खिलाफ प्रशासन कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय करेगा।
उन्होंने बताया कि सभी जांच टीमों को निर्देश दिया गया है कि निरीक्षण के दौरान वहां रहने वाली संवासिनी लड़कियों से अलग बातचीत कर संचालक के व्यवहार के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट में दर्ज कराएं।
भगवान भरोसे लड़कियों की सुरक्षा व्यवस्था, इंतजाम बदहाल
जांच टीमों ने राजकीय बाल गृह बालिका मोतीनगर, लीलावती मुंशी बाल गृह मोतीनगर, राजकीय बाल गृह बालक मोहान रोड, राजकीय संप्रेक्षण गृह मोहान रोड, श्रीराम औद्योगिक अनाथालय अलीगंज और नव जाग्रति आश्रयगृह रायबरेली रोड सहित स्वधर अल्पावास गृह की भी सघन जांच की।
इस दौरान अधिकतर जगह संवासिनी की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे मिली। इनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड अधिकांश जगह गायब मिले। सामने आया कि सुरक्षा ड्यूटी में मनमानी बरती जाती है। यह भी उजागर हुआ कि सरकार से लाखों का अनुदान पाने के बाद भी संवासिनी लड़कियों के रहने के इंतजाम बदहाल थे। जिन कमरों में लड़कियां रह रही थीं, वहां साफ-सफाई की स्थिति भी काफी खराब थी। संचालन के तय मानकों का भी अनुपालन नहीं हो रहा था।
पहले भी दागदार हो चुके बालिका गृह
राजधानी में संचालित कुछ बालिका गृह संवासिनियों के रखरखाव में लापरवाही व गड़बड़ी बरतने से दागदार हो चुके हैं। बीते साल ही राजकीय बालिका गृह में एक लड़की के गर्भवती होने के मामले में अधीक्षिका रुपेंदर कौर के साथ नर्स पर भी घेरा कसा गया था। पूरे मामले से पर्दा उठने के बाद रुपिंदर को उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग में तलब किया गया था, लेकिन वह नहीं पहुंची थी।
हालांकि उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। मोतीनगर स्थित बालिका गृह में कुल 72 लड़कियां रहती हैं। अक्सर दूसरे जिले की लड़कियों को भी यहां भेजा जाता है, जिनकी उम्र 18 साल से कम हो। इससे अधिक उम्र की लड़कियों को रायबरेली स्थित बालिका गृह भेज दिया जाता है।
गौरतलब है कि रुपिंदर कौर पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। तीन साल पहले जनवरी 2013 में वह बाल गृह प्राग नारायण रोड की अधीक्षिका थीं, तब पांच बच्चे भाग गये थे। उन्होंने बाद में बताया था कि उन्हें प्रताड़ित किया जाता था। शासन स्तर पर हुई जांच में कौर को दोषी भी पाया गया था।
वहीं, कौर को कार्रवाई के नाम पर राजकीय संवासिनी शरणालय का प्रभार दिया गया था। यहां से भी दो संवासिनी के भागने के बाद उन्हें रायबरेली भेज दिया गया था।