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कामयाबी: यूपी की सालाना सॉफ्टवेयर निर्यात में ऊंची छलांग, 40 हजार करोड़ के पार पहुंचा, युवाओं को बड़ा फायदा

Wed, 22 Nov 2023 09:32 AM IST
शाहरुख खान अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 22 Nov 2023 09:32 AM IST
सार

सॉफ्टवेयर स्टार्टअप शुरू करने का सबसे बढ़ा लाभ युवाओं को है। आईटी मंत्रालय की एनजीआईएस (नेशनल जेनरेशन इंक्यूबेशन स्कीम) के तहत हर क्षेत्र में स्टार्टअप तैयार किए जा रहे हैं। देश में 12 स्थानों पर इस योजना के तहत केंद्र बनाए गए हैं। 

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Success Annual software exports from UP crossed Rs 40 thousand crores
software exports - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगातार बढ़ रहे सॉफ्टवेयर निर्यात में लखनऊ ने ऊंची छलांग लगाई है। यूपी का सालाना सॉफ्टवेयर निर्यात 40 हजार करोड़ रुपये के पार चला गया है। इधर, लखनऊ ने भी 550 करोड़ का निर्यात करते हुए 150 करोड़ की बढ़ोतरी की है। अहम यह है कि इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए एनजीआईएस योजना के तहत 42 नए स्टार्ट अप तैयार किए गए हैं। 
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इनमें आठ को 25-25 लाख रुपये दिए गए हैं और बाकी को भी यह रकम दी जाएगी। तकनीक हर क्षेत्र अपनी धमक दिखा रही है। विज्ञान के अलावा खास तौर पर चिकित्सा, विधि, कृषि, परामर्श जैसे क्षेत्रों में भी सॉफ्टवेयर तकनीक ने उछाल मारी है। उप्र सरकार ने इस पर फोकस किया है। 
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आईटी मंत्रालय के अधीन काम कर रहे एसटीपीआई ( सॉफ्टवेयर टेक्नॉलजी पार्क़स ऑफ इंडिया) ने इस पर योजनबद्ध तरीके से कार्य किया है। स्टार्टअप तैयार किए जा रहे हैं जो खास तौर से सॉफ्टवेयर निर्यात कर रहे हैं। 
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पूरे प्रदेश की बात करें तो वर्ष 2020-21 में प्रदेश का सॉफ्टवेयर निर्यात सालाना 28 हजार करोड़ था जो इस समय 40 हजार करोड़ के पार चला गया है। इसमें लखनऊ का हिस्सा 400 करोड़ था। यह भी बढ़कर 550 करोड़ से ऊपर हो गया है। अगले एक साल में इसे 700 करोड़ तक ले जाने की तैयारी है।

युवाओं को बड़ा लाभ
सॉफ्टवेयर स्टार्टअप शुरू करने का सबसे बढ़ा लाभ युवाओं को है। आईटी मंत्रालय की एनजीआईएस (नेशनल जेनरेशन इंक्यूबेशन स्कीम) के तहत हर क्षेत्र में स्टार्टअप तैयार किए जा रहे हैं। देश में 12 स्थानों पर इस योजना के तहत केंद्र बनाए गए हैं। उप्र में लखनऊ और प्रयागराज में दो केंद्र हैं जिनके जरिए स्टार्ट अप तैयार किए जा रहे हैं। 

 

इस योजना में फंड के अलावा छह माह तक 30 हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। एसटीपीआई के अपर निदेशक डा. प्रदीप कुमार द्विवेदी के मुताबिक 42 स्टार्ट अप इस योजना में चुने गए हैं जिनमें से आठ को 25- 25 लाख रुपये फंड दे दिया गया है। इसके अलावा लीप अहेड प्रोग्राम में एक करोड़ रुपये तक फंड देने की तैयारी है।

चिकित्सा जगत में अद्भुत सफलता
नई आईटी नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। विशेष रूप से चिकित्सा जगत में सॉफ्टवेयर के प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप का अहम प्रयोग लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआईएमएस) में शुरू हुआ है।

एसजीपीजीआई प्रबंधन और एसटीपीआई के इस साझा कार्यक्रम में क्लीनिकली ट्रायल पर लगातार काम किया जा रहा है। एसटीपीआई ने हाल ही में 28 ऐसे स्टार्टअप तैयार कराए हैं जो केवल चिकित्सा जगत में सॉफ्टवेयर तकनीक पर प्रयोग कर रहे हैं। इनमें से छह तो अपने उत्पादों को पेटेंट भी करा चुके हैं।

हार्डवेयर भी किसी से कम नहीं
तकनीक के इस बढ़ते विस्तार में हार्डवेयर भी कम नहीं है। प्रदेश भर से इसका निर्यात भी 1500 करोड़ के पार चला गया है। इस समय प्रदेश में एसटीपीआई के पांच सेंटर लखनऊ, नोएडा, कानपुर, प्रयागराज और मेरठ में हैं। अन्य चार प्रस्तावित हैं जिनमें आगरा में सेंटर बनकर तैयार हो चुका है। गोरखपुर में जून 2024 तक तैयार हो जाएगा। बरेली में निर्माण शुरू हो चुका है जबकि वाराणसी में भी स्थान का चयन हो चुका है और जल्द ही काम शुरू होगा। इन चारों के बनने के बाद यूपी का सॉफ्टवेयर निर्यात और लंबी उड़ान भरेगा।
 

तकनीक के जरिए युवाओं को रोजगार देने पर तेजी से काम हो रहा है। स्टार्टअप तैयार हो रहे हैं। इसी का परिणाम हैं कि यूपी का सॉफ्टवेयर निर्यात 40 हजार करोड़ रुपये के पार चला गया है। वर्तमान में एसटीपीआई पार्कों से 342 एक्सपोर्ट यूनिट जुड़ी हैं। 101 कंपनियां इंन्क्युबेशन सेंटर से जुड़ी है। जल्द ही प्रदेश में एसटीपीआई के चार और सेंटर यानी पार्क शुरू होंगे तो इसमें और इजाफा होगा। युवाओं के लिए रोजगार के नए मार्ग खुलेंगे। एक ही पार्क से छह हजार से ज्यादा युवाओं को तत्काल फायदा मिलता है। - डा. प्रदीप कुमार द्विवेदी, अपर निदेशक, एसटीपीआई
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