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बर्फबारी में फंसे स्टूडेंट्स बोले- 'पता ही नहीं चला, सुहानी बर्फ कब हो गई घातक'

Thu, 24 Jan 2019 03:12 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 24 Jan 2019 03:12 PM IST
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students faced crisis during snow falling in Himachal Pradesh
हिमाचल में भारी बर्फबारी के बीच फंसे लखनऊ के छात्र - फोटो : amar ujala
हिमाचल जाकर हर किसी की ख्वाहिश होती है कि बर्फबारी हो जाय। कुफरी पहुंचने पर बर्फबारी होने लगी तो लगा आने का मकसद पूरा हो गया। सुहानी बर्फबारी धीरे-धीरे घातक होती जा रही थी, लेकिन हमें इसका अंदाजा नहीं हो रहा था। हमारा ध्यान तब गया जब रास्तों पर पूरी तरह से बर्फ जम चुकी थी।
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जाने के रास्ते बंद हो चुके थे, ठंड बढ़ रही थी और सिर छिपाने की जगह नहीं थी। ऐसे में गोरखा रेजीमेंट, स्थानीय प्रशासन और इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने हमारी मदद की। लखनऊ के मैक एकेडमी के डायरेक्टर रमन शर्मा ने ‘अमर उजाला’ से हिमाचल की बर्फबारी में फंसने का वाकया इन शब्दों के साझा किया।
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रमन शर्मा मैक की तीनों शाखा के करीब 80 विद्यार्थियों के साथ ही हिमाचल की शैक्षणिक यात्रा पर गये हुए थे। रमन शर्मा ने बताया कि उनकी टीम 18 जनवरी को हिमाचल के लिए रवाना हुई थी। 21 को हम लोग कुफरी पहुंचे। कुफरी में शाम से ही बर्फ पड़नी शुरू हो गई।
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इसके अगले दिन भी बर्फ पड़ती रही। हम लोगों ने हल्की बर्फबारी को देखते हुए आउटिंग का प्लान बनाया। मौसम शानदार था। हम सभी मस्ती के मूड में थे। पर बर्फबारी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। बर्फबारी यहां तक बढ़ी कि हम लोग वहीं फंस गये।

कभी नहीं भूलेगा वो मंजर

ऐसे में हम लोगों को कुछ सूझ नहीं रहा था। ऐसे में पास में लगे गोरखा रेजीमेंट के कर्नल नीरज, कर्नल सुनील ने अपने जवानों के साथ हमारी मदद की। स्थानीय प्रशासन ने भी हमारा सामान नीचे भिजवाया तथा हमें निकलने में मदद की। इसके बाद बुधवार रात को हम चंडीगढ़ पहुंचे।

शैक्षणिक यात्रा पर गए शिवांगी, सुनैना और आकाश ने बताया कि वहां पर इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने काफी मदद की। उन्होंने कोई आसरा न होने पर हमें रहने केलिए अपने कमरे दे दिए। उन विद्यार्थियों ने भयंकर हालत में हमारी मदद न की होती तो फिर सर्दी के मारे ही हमारी जान निकल जाती।

मयंक और कृष ने बताया कि हम लोगों को वहां से निकलने के लिए कई किलोमीटर बर्फ पर चलना पड़ा। सड़क बंद होने की वजह से कोई वाहन नहीं आ सकता था। इसलिए एक ही रास्ता था कि दिन होते ही हम लोग पैदल चल दें। सेना और स्थानीय प्रशासन ने हमारी मदद करकेसामान नीचे भिजवा दिया था। इसके बाद हम लोगों को पैदल जाकर वापसी का रास्ता तलाशना था।

चंडीगढ़ पहुंचे अतुल ने फोन पर बताया कि वो कभी भी वो भयानक मंजर नहीं भूल पाएंगे। उस मंजर में डर लगने लगा था कि आखिर अपने घर पहुंच भी पाएंगे या फिर नहीं। शिक्षक और साथियों के साथ होने की वजह से हिम्मत बंधी रही। अब लग रहा है कि घर वालों के पास जल्दी से जल्दी पहुंचूं।
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