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अफसरों की 'नादानी', भुगत रहे लाखों छात्र!

Thu, 02 Apr 2015 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 02 Apr 2015 01:39 AM IST
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Students face problem on scholorship issue.

छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में एक के बाद एक सामने आए घपले से सबक लेते हुए पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के इस्तेमाल का फैसला तो ठीक था, मगर नई व्यवस्था लागू करने में हर स्तर पर भारी चूक हुई।

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पारदर्शिता लाने के लिए यह अब तक का सबसे बेहतर सिस्टम है, लेकिन अधिकारी नई तकनीक के हिसाब से खुद को नहीं ढाल पाए और नतीजा करीब 17 लाख छात्रों को भुगतना पड़ा।
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शुरू से ही पता था कि पीएफएमएस सॉफ्टवेयर हर बिंदु की जांच बड़ी ही बारीकी से करता है। मसलन, अगर एकाउंट नंबर का पहला डिजिट ‘जीरो’ है और छात्र ने इसे छोड़ दिया तो पीएफएमएस सॉफ्टवेयर उस खाता नंबर को स्वीकार नहीं करेगा।
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वहीं, छात्र ने खाता नंबर सही भी लिखा हो, मगर आईएफएस कोड गलत होगा तो पीएफएमएस सॉफ्टवेयर उसे स्वीकार नहीं करेगा।

आवेदन में सही जानकारी भरना छात्र की जिम्मेदारी है, लेकिन संस्थान और फिर जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा इसे जांचने की व्यवस्था इसलिए की गई है कि छात्र के स्तर पर हुई गलती को पकड़ा जा सके।

विद्यार्थी भी कम दोषी नहीं

Students face problem on scholorship issue.

हालांकि, इसमें विद्यार्थियों को भी कम दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि ऑनलाइन आवेदन में गलतियां सुधारने के लिए उन्हें एक महीने से ज्यादा का समय दिया गया था।

वहीं, संस्थानों की लापरवाही भी कम नहीं रही, क्योंकि सारे दस्तावेज चेक करने की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं की थी। आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ बैंक की पासबुक लगाना भी अनिवार्य था, जिसमें खाता नंबर के साथ आईएफएस कोड भी दर्ज होता है। अगर संस्थानों ने गंभीरता से जांच की होती तो यह खामी वहीं पकड़ में आ जाती।

जानकारों का कहना है कि पीएफएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से खातों की स्क्रूटनी मार्च के आखिरी चार-पांच दिनों में ही कराई गई, जब खातों में राशि भेजने के लिए ट्रेजरी बिल तैयार करवा लिए गए।

अगर यह स्क्रूटनी समय रहते करा ली जाती तो छात्रों को गलती सुधारने का एक और मौका मिल जाता और उनकी रकम नहीं फंसती।

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