दो हमें अधिकार, आखिर कब तक करें इंतजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हजरतगंज फिर एक बार महिला हिंसा के खिलाफ मुखर होती आवाजों से गूंजने लगा है। करीब डेढ़ वर्ष पहले निर्भया कांड के बाद उपजा गुस्सा फिर से उफन रहा है।
गुरुवार को यहां सामाजिक संगठनों ने बदायूं दुराचार कांड और प्रदेश में लगातार हो रहीं दुराचार की घटनाओं के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया।
संस्था ब्रेक थ्रू के कार्यक्रम में दस्तक, आली, उपेक्षित महिला जनकल्याण समिति, रेस इंडिया फाउंडेशन, ऐस फाउंडेशन भी शामिल रहे। इस दौरान ‘इंतजार क्यूं’ नामक नाटक प्रस्तुत किया गया। इसमें समाज का महिलाओं के प्रति दकियानूसी नजरिया उठाया गया।
साथ ही सवाल उठाया कि क्या दुराचार के बाद महिलाओं को मुआवजा देकर राहत दी जा सकती है। हरगिज नहीं, जवाब मिला।
संदेश था कि मुआवजा लेकर संतोष नहीं मिल सकता, जरूरी है कि अपराधियों को कानून जल्द से जल्द सजा दे। ताकि कानून का डर तो बने।
इस मौके पर आली की रेणू मिश्रा ने विचार रखे कि सरकार अगर बदायूं के अपराधियों को सख्त सजा देगी तो ऐसी सोच रखने वालों में डर पैदा होगा।
दस्तक के दीपक कबीर, यूएमजेवीएस से प्रीति, ऐस फाउंडेशन से जीशान और ब्रेकथ्रू के सुनील व अर्चना ने भी विचार रखे।
सभी ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी। वहीं, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें राज्य सरकार से त्वरित न्याय की मांग की गई है। डीएम के नाम एक ज्ञापन दिया गया।