नखलऊवा पंच: गुप्त ने लखनऊ में नमक कानून तोड़कर दी थी अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती
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अंग्रेजी हुकूमत में भारतीयों पर तमाम बंदिशें लगाई गईं थी। एक बंदिश नमक को लेकर भी थी। भारतीयों पर प्रतिबंध था कि कोई भी नमक नहीं बना सकता है। नतीजा यह था कि भारतीयों को इंग्लैंड से आयातित नमक ही खरीदना पड़ता था।
जाहिर है कि नमक जैसी वस्तु के लिए भारतीयों को मुंहमांगी कीमत देनी पड़ती थी। इसके विरोध में महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक पदयात्रा निकाली। लखनऊ में भी नमक कानून तोड़ने की घोषणा हुई।
चंद्रभानु गुप्त जनसेवा संस्थान के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह काका बताते हैं, ‘बात 1930 की होगी। बापू के दांडी मार्च से लोग जुड़ते जा रहे थे। अंग्रेजी हुकूमत इस मार्च को विफल करने के लिए पूरी ताकत लगाए थी। गुप्त की उस समय उम्र कोई 28 वर्ष रही होगी
गुप्त की यह पहली गिरफ्तारी थी
उनके मन में भी इच्छा जागी कि लखनऊ में भी इस कानून को तोड़कर अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी जाए। जगह-जगह कड़ी चौकसी। पर, गुप्त के दिल में बार-बार यह हूक उठ रही थी कि लखनऊ में भी इस कानून को तोड़ना है। उन्होंने कुछ साथियों से सलाह-मशविरा करके योजना बनाई।
सभी लोग अमीनाबाद पहुंचे। चारों तरफ पुलिस। लोगों से पूछताछ। ये लोग एक-एक करके अमीनाबाद स्थित गूंगे नवाब पार्क पहुंचे। जब तक कोई कुछ समझता ये सभी लोग पार्क के अंदर। नमक बनाकर कानून तोड़ा और भारत माता जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारों के शोर से हड़बड़ाई पुलिस पार्क पहुंची और गुप्त जी को गिरफ्तार कर लिया। गुप्त की यह पहली गिरफ्तारी थी।’