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...जब एनडी तिवारी को बंद कर दिया गया था गुंडे छैला खां के बैरक में

Mon, 01 Oct 2018 04:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 01 Oct 2018 04:40 PM IST
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story related to former chief minister narayan dutt tiwari
नारायण दत्त तिवारी - फोटो : डेमो
बात उन दिनों की है जब नारायण दत्त तिवारी स्वाधीनता आंदोलन में सक्रियता के चलते पिता पूर्णानंद तिवारी के साथ गिरफ्तार हो गए। बरेली का केंद्रीय कारागार कैदियों को यातना देने में कुख्यात था। तिवारी जी को भी इसी में रखा गया।
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नैनीताल के काशीपुर के इंद्रवर्मा चौहान के संस्मरण से पता चलता है जेल की चार बैरकों में 18 वर्ष से कम उम्र के बालक रखे गए थे। इसी जेल में एक बदनाम गुंडा छैला खां भी बंद था, जो वार्डन बना दिया गया था। बालक तिवारी प्रतिदिन उसे किसी न किसी को पीटते देखते।
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तिवारी जी ने इसका प्रतिकार करने का फैसला लिया। आमतौर पर वह प्रातः 4 बजे उठ जाते। एक दिन ऊपर उठकर उन्होंने झंडा गीत विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा गाना शुरू कर दिया। वार्डन छैला खां ने इसे अपना अपमान समझा और तिवारी जी की कनपटी पर तेज मुक्का मार दिया।
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तिवारी जी ने भूख हड़ताल शुरू कर दी

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मुक्के की चोट से तिवारी जी के कान का पर्दा चोटिल हो गया और वह एक कान से बहरे हो गए, पर तिवारी जी भी झंडा गीत गाने पर अड़े रहे। उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी। मामला जेल में ही बंद रफी अहमद किदवई के कानों तक पहुंचा ।

किदवई ने जेल के अधिकारियों से कहा यदि तिवारी को झंडागीत गाने की अनुमति न मिली तो हमें भी कुछ निर्णय लेना होगा। आखिरकार अधिकारी झुके और गीत गाने की अनुमति मिली। साथ ही वार्डन खां को भी हटा दिया गया। 
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