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इस ठग ने बॉलीवुड से पॉलिटिक्स तक फैलाया नेटवर्क
अमर उजाला ब्यूरो/लखनऊ
Updated Sun, 22 Sep 2013 01:39 AM IST
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आईएएस अफसर बनकर ठगी करने वाले गैंग के मास्टरमाइंड साहिल उर्फ निस्सू ने तीन वर्ष में बॉलीवुड से पॉलिटिक्स तक नेटवर्क फैला लिया था।
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तीन हफ्ते पहले ही केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने उसे इस्पात उपभोक्ता परिषद का सदस्य मनोनीत किया था। गिरफ्तारी के दौरान हजरतगंज पुलिस को उसके पास से परिषद की सदस्यता का कार्ड मिला है।
साथ ही पता चला कि निस्सू केंद्र सरकार की कई कमेटियों में सदस्य था। पुलिस का मानना है निस्सू ने कई लोगों को निशाना बनाया है। उसके तीन बैंक खाते, लैपटॉप और मोबाइल फोन खंगाले जा रहे हैं।
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साहिल उर्फ निस्सू की गिरफ्तारी से शहर के एक बड़े तबके में हलचल है। चूंकि, उसके संबंध कई आईएएस और आईपीएस अफसरों के बड़े कारोबारियों से हैं। इसलिए ठगी के धंधे में अपना नाम सामने आने से सभी सहमे हुए हैं।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक अपनी एनजीओ साहिल फाउंडेशन के जरिए निस्सू ने अफसरों से नजदीकियां बढ़ाईं। उसके मोबाइल में 70 से ज्यादा अफसरों के निजी व सरकारी नंबर मिले हैं।
कई अफसरों का उसके घर आना-जाना था। पूछताछ में निस्सू ने बताया कि इन्हीं अफसरों के सहारे उसने बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन, जैकी श्रॉफ, प्रेम चोपड़ा और शरमन जोशी जैसे कलाकारों को अपने इंस्टीट्यूट पीआईपीएस बुलवाया था।
सुर्खियां मिलने पर निस्सू की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी जाग उठी थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह राज्य और केंद्र के कई विधायकों और मंत्रियों से नजदीकियां बढ़ा रहा था। महीने में कई बार उसका दिल्ली आना-जाना होता था।
उसकी गिरफ्तारी भी अमौसी एयरपोर्ट पर दिल्ली से लौटते समय हुई। सीओ हजरतगंज दिनेश यादव ने बताया कि 10 सितंबर को ही केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने उसे इस्पात उपभोक्ता परिषद का सदस्य मनोनीत किया था।
केंद्र सरकार की कई अन्य कमेटियों में भी निस्सू के सदस्य होने की जानकारी मिली है। सीओ के मुताबिक शातिर निस्सू ने कई लोगों को निशाना बनाया है लेकिन ब्लैकमनी होने के चलते कोई शिकायत नहीं कर रहा।
सीओ ने कहा कि निस्सू के निजी एकाउंट के अलावा एनजीओ साहिल फाउंडेशन तथा एक अन्य बैंक एकाउंट हैं, जिसकी डिटेल निकलवाई जा रही है। धोखाधड़ी के इस मामले में आईटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जा रही हैं।
फर्जी मिले कारों के नंबर
मास्टरमाइंड की चारों कारों के नंबर फर्जी पाए गए हैं। सीओ हजरतगंज ने कारें चोरी की होने की आशंका जताई है। उन्होंने बताया कि कार में बीजी सिरीज के नंबर डाले गए थे। इस सिरीज की ज्यादातर कारें सचिवालय के अफसरों के पास हैं।
नीली बत्ती लगी होने से इन कारों को न कोई रोकता था न ही चेकिंग होती थी। सीओ ने बताया कि कारों के इंजन व चेसिस नंबर की जांच कराई जा रही है।
लखनऊ में तैनात रहे हैं सिपाही
ठगों के साथी सिपाही दूधनाथ और राम सजन सरोज पहले लखनऊ में तैनात रहे हैं। सीओ हजरतगंज ने बताया कि सिपाहियों को निस्सू अपना रोल निभाने के लिए 25 से 30,000 रुपये तक देता था।
अक्सर सिपाही निस्सू के काम के लिए छुट्टी लेकर आ जाते थे। दोनों के निलंबन की कार्रवाई चल रही है।
पीआईपीएस में लटका ताला
मास्टरमाइंड निस्सू की गिरफ्तारी के बाद से पीआईपीएस के लालबाग बीएन रोड स्थित ऑफिस में ताला लटका है। शनिवार सुबह पीआईपीएस आए लोगों ने ताला देखकर आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की तो उन्हें पूरी कहानी का पता चला।