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लखनऊ के गौरव का हॉकी के प्रति गजब है समर्पण भाव, जेब खर्च से करते हैं जरूरतमंद खिलाड़ियों की मदद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 03 Nov 2018 03:01 PM IST
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गौरव अवस्थी
- फोटो : amar ujala
चार बार अंडर 16 में खेल चुके गौरव चोट लगने के कारण अब भले ही मैदान पर अपना करिश्मा न दिखा पाते हो, लेकिन मैदान के बाहर रहकर उभरते खिलाड़ियों की मदद करने में जुटे हैं। इतना ही नहीं कला छात्रों को मंच प्रदान करने की जद्दोजहद में भी वह लगे रहते हैं।
भारतीय युवा इस समय जहां क्रिकेट के दीवाने हैं, वहीं गौरव अवस्थी के लिए राष्ट्रीय खेल हॉकी ही सब कुछ है। चार बार उत्तर प्रदेश की अंडर-16 टीम से खेल चुके गौरव अवस्थी इस खेल को फिर से पुराने दिन लौटाना चाहते हैं। चोट के कारण खेल से बाहर हो चुके गौरव अब प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ियों को जरूरी सामान मुहैया कराते हैं।
खेल के साथ ही राष्ट्रीय कला मंच के साथ मिलकर ललित कला के विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने का काम भी वह कर रहे हैं। गौरव ने सात साल की उम्र में ही हॉकी की स्टिक थाम ली थी। हॉकी के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के स्टाइपेंड पर रहने का मौका दिया।
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अपनी प्रतिभा के दम पर गौरव ने 50 से ज्यादा प्रदेशस्तरीय टूर्नामेंट खेले। चार बार अंडर-16 की टीम में चुने गये। इसमें एक बार स्वर्ण पदक के हकदार भी बने। दो बार जूनियर स्टेट टूर्नामेंट में प्रतिभाग किया। हॉकी को पुराना गौरव मिल सके इसलिए अपने जेब खर्च और दोस्तों से पैसा जमा करके जरूरतमंद खिलाड़ियों को जरूरी किट आदि दिलाते हैं।
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भारतीय युवा इस समय जहां क्रिकेट के दीवाने हैं, वहीं गौरव अवस्थी के लिए राष्ट्रीय खेल हॉकी ही सब कुछ है। चार बार उत्तर प्रदेश की अंडर-16 टीम से खेल चुके गौरव अवस्थी इस खेल को फिर से पुराने दिन लौटाना चाहते हैं। चोट के कारण खेल से बाहर हो चुके गौरव अब प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ियों को जरूरी सामान मुहैया कराते हैं।
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खेल के साथ ही राष्ट्रीय कला मंच के साथ मिलकर ललित कला के विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने का काम भी वह कर रहे हैं। गौरव ने सात साल की उम्र में ही हॉकी की स्टिक थाम ली थी। हॉकी के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के स्टाइपेंड पर रहने का मौका दिया।
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अपनी प्रतिभा के दम पर गौरव ने 50 से ज्यादा प्रदेशस्तरीय टूर्नामेंट खेले। चार बार अंडर-16 की टीम में चुने गये। इसमें एक बार स्वर्ण पदक के हकदार भी बने। दो बार जूनियर स्टेट टूर्नामेंट में प्रतिभाग किया। हॉकी को पुराना गौरव मिल सके इसलिए अपने जेब खर्च और दोस्तों से पैसा जमा करके जरूरतमंद खिलाड़ियों को जरूरी किट आदि दिलाते हैं।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ चला रहे हैं मुहिम
गौरव अवस्थी
- फोटो : amar ujala
गौरव अवस्थी मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग को लेकर मुहिम छेड़े हुए हैं। इसके साथ ही खेल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए भी उनका अभियान चल रहा है। इसको लेकर उन्होंने एक और द्रोणाचार्य नामक किताब भी लिखी है।
गौरव अवस्थी ने इस साल लविवि से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री प्राप्त की है। पढ़ाई के दौरान गौरव लविवि की हॉकी टीम के कप्तान रह चुके हैं। उनकी कप्तानी में विवि की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। गौरव के अनुसार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी इन्हीं मैदानों से निकल सकते हैं।
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