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...लेकिन श्रेय तो दद्दू ही ले जाते हैं
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 24 Dec 2013 01:01 PM IST
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सूबे में राज्य कर्मचारियों के यूं तो कई संगठन हैं। भले ही मांगें सबकी एक हों लेकिन वे एक मंच पर नहीं आते हैं।
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सभी अपने-अपने में किसी मठाधीश से कम नहीं हैं। इसलिए एक जैसी मांगों के लिए आंदोलन भी अलग-अलग ही करते हैं।
इन्हीं में से एक कर्मचारी नेता जो अब बुजुर्ग हो गए हैं, उन्होंने सरकार में अपनी सेटिंग खूब कर रखी है।
आंदोलन कोई करे लेकिन जब शासनादेश जारी होने की नौबत आती है तो सरकार उन्हें ही बुलाकर आदेश की प्रति दे देती है।
कुछ सलाह भी करनी होती है तो उन्हीं से की जाती है। सरकार से वार्ता करने भी वे खुद ही चले जाते हैं।
अब लोग भी कहने लगे हैं कि मेहनत चाहे जो करे लेकिन श्रेय तो दद्दू ही ले जाएंगे।
दद्दू की इस खूबी से अब तो दूसरे नेता परेशान भी होने लगे हैं।