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कर्मचारियों के वेतन से मुख्यमंत्री कोष के लिए चंदा लेने का विरोध, कहा- ये जबरन वसूली जैसा

Sun, 15 Dec 2019 01:54 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क,अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 15 Dec 2019 01:54 PM IST
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State employees oppose on taking money for Mukhyamantri Kosh.

कर्मचारियों के वेतन से मुख्यमंत्री कोष के लिए चंदा लेने के शासन के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि सभी राजकीय सेवकों के वेतन से 500 रुपये प्रतिमाह काटकर मुख्यमंत्री कोष में जमा कराने के फरमान से कर्मचारियों में आक्रोश है।

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संयुक्त परिषद ने जिलों से मिली प्रतिक्रिया के बाद शनिवार को सुरेश रावत की अध्यक्षता में बैठक करके इसे तुगलकी फरमान बताया है। साथ ही मुख्यमंत्री से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है।
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अतुल मिश्रा ने कहा कि अगर कर्मचारी अधिकारी और पेंशनर को जोड़ देंगे तो करीब 200 करोड़ रुपये प्रतिमाह सरकारी लेवी बनती है। आपदा विशेष के समय स्वेच्छा से आर्थिक मदद ली जा सकती है लेवी लगाकर नहीं।

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बोले-आपदा के वक्त हमेशा मदद करते हैं कर्मचारी

कर्मचारियों का कहना है कि वह प्रदेश सरकार के साथ हैं और आपदा के समय सरकार के साथ खड़े रहते हैं। कई बार अपने वेतन का हिस्सा दान भी किया है, लेकिन इस आदेश से जबरन वसूली की बू आ रही है।

परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव, संगठन के प्रमुख संरक्षक केके सचान ने कहा कि यह आदेश जबरदस्ती धन वसूली जैसा लगता है। इसलिए परिषद इस आदेश के विरोध में है। किसी आपदा की स्थिति में कर्मचारी हमेशा देश व प्रदेश के साथ खड़ा है।

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