{"_id":"68833442a41896e08808f375","slug":"stand-up-india-relying-on-public-banks-up-became-country-leading-state-important-changes-happened-in-2025-2025-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP News: सार्वजनिक बैंकों के भरोसे स्टैंडअप इंडिया... लाभार्थियों में सबसे टॉप पर लखनऊ; 2025 में हुए अहम बदलाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: सार्वजनिक बैंकों के भरोसे स्टैंडअप इंडिया... लाभार्थियों में सबसे टॉप पर लखनऊ; 2025 में हुए अहम बदलाव
Fri, 25 Jul 2025 01:08 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Fri, 25 Jul 2025 01:08 PM IST
सार
स्टैंडअप इंडिया का सपना सार्वजनिक बैंकों के भरोसे चल रहा है। लाभार्थियों में लखनऊ सबसे टॉप पर है। 2025 में कई अहम बदलाव भी किए गए हैं। सार्वजनिक बैंकों ने अब तक 24,811 पात्रों के कर्ज मंजूर किए। इनमें से 17,845 को लाभ मिला।
विज्ञापन
Bank (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : freepik
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शून्य से व्यवसाय शुरू करने की मंशा रखने वालों के लिए आर्थिक संबल बनी स्टैंडअप इंडिया योजना में लखनऊ प्रदेश और मंडल दोनों स्तरों पर टॉप पर है। बीते 10 वर्षों में सार्वजनिक बैंकों ने 17,845 लाभार्थियों को 2965 करोड़ रुपये का कर्ज देकर योजना को जीवंत बनाए रखा है। जहां सार्वजनिक बैंक योजना को गति दे रहे हैं, वहीं निजी बैंक अब भी संकोच में हैं। सरकार यदि निजी बैंकों की भागीदारी बढ़ाने के उपाय करे, तो योजना और व्यापक असर दिखा सकती है।
स्टैंडअप इंडिया के तहत हर बैंक शाखा को एक एससी, एक एसटी और एक महिला उद्यमी को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का ऋण देना तय है। लखनऊ में 2024 पात्रों में से 1291 को कुल 242.23 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया। इसके बाद आगरा और कानपुर नगर का स्थान रहा। सार्वजनिक बैंकों ने अब तक 24,811 पात्रों के कर्ज मंजूर किए, जिनमें से 17,845 को लाभ मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टैंडअप इंडिया के तहत हर बैंक शाखा को एक एससी, एक एसटी और एक महिला उद्यमी को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का ऋण देना तय है। लखनऊ में 2024 पात्रों में से 1291 को कुल 242.23 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया। इसके बाद आगरा और कानपुर नगर का स्थान रहा। सार्वजनिक बैंकों ने अब तक 24,811 पात्रों के कर्ज मंजूर किए, जिनमें से 17,845 को लाभ मिला।
विज्ञापन
निजी बैंक और ग्रामीण बैंक पीछे
- ग्रामीण बैंक: 2,178 पात्रों में से 1,873 को ही मिला कर्ज, कुल राशि 311.47 करोड़
- निजी बैंक: 1,633 में से केवल 493 पात्रों को मिला ऋण, कुल 138.86 करोड़ रुपये
- कुल टारगेट: 33,640 पात्रों में से अब तक 28,625 को मंजूरी, पर केवल 20,214 को मिला ऋण
उत्तर प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य
योजना के राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यह सफलता बताती है कि प्रदेश में योजना का क्रियान्वयन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रभावी रहा है।
विज्ञापन
2025 में आए ये अहम बदलाव
- वित्त मंत्रालय ने योजना में वर्ष 2025 से कुछ संशोधन किए हैं।
- परियोजना लागत में बदलाव: अब सब्सिडी की दर 25% से घटाकर 15% कर दी गई है।
- नई श्रेणियां शामिल: अब रेशम पालन, मधुमक्खी पालन, एग्री-बिजनेस और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी योजना में कर्ज मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
आंकड़े एक नजर में-
जिला स्वीकृत पात्र मिला कर्ज वितरित (कर्ज करोड़ में)-| लखनऊ | 2024 | 1291 | 242.23 |
| आगरा | 1421 | 1175 | 211.99 |
| कानपुर नगर | 1940 | 1171 | 213.01 |
| वाराणसी | 1430 | 1004 | 193.35 |