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Election 2024: यूपी को साधने के लिए BJP ने बनाया ये प्लान, विष्णु, मोहन और भजन के जरिए बनाई खास रणनीति
Mon, 18 Dec 2023 07:47 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 18 Dec 2023 07:47 AM IST
सार
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए जातीय गणित साधने की रणनीति बनाई है। विष्णु, मोहन और भजन के सहारे यूपी में जातीय गणित साधेंगे। भाजपा के ब्राह्मण, यादव और जनजातीय नेता प्रचार में जुटे हैं। यादव महासभा भी भाजपा का आभार जता चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा ने राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय के जरिये यूपी में जातीय गणित साधने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने ब्राह्मण, यादव और जनजातीय नेताओं को अपने-अपने समाज के बीच यह संदेश पहुंचाने को कहा है कि राजस्थान में ब्राह्मण, एमपी में यादव (पिछड़े) और छत्तीसगढ़ में एक सामान्य आदिवासी परिवार के कार्यकर्ता को सीएम बनाकर भाजपा ने उनके समाज का सम्मान बढ़ाया है।
यूपी में लंबे अर्से से कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं हुआ है। यादव समाज पर अपना हक समझने वाली सपा जब भी सत्ता में आई सरकार की कमान नेतृत्व वाले परिवार में ही रही है। ऐसे में यूपी में ब्राह्मण डिप्टी सीएम के बाद राजस्थान में सीएम बनाकर पार्टी इस समाज को यह संदेश देने में जुट गई है कि उनका सम्मान भाजपा में ही है।
मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यादव समाज से सीएम बनाकर यूपी में यादव समाज को बताना शुरू कर दिया गया है कि भाजपा में कोई भी किसी भी पद पर पहुंच सकता है, चाहे वह यादव ही क्यों न हो। यह भी बताया जा रहा है कि यादव समाज सपा में नेतृत्व का पद तो कभी नहीं पा सकता। जब भी ऐसा अवसर आएगा, अखिलेश यादव या उनका परिवार ही मौका पाएगा।
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यूपी में आदिवासी मतदाताओं की संख्या तो ज्यादा नहीं है, लेकिन पूर्वांचल की कुछ सीटों को यह समुदाय प्रभावित करता है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से सीएम बनाकर पार्टी ने दलितों-आदिवासियों को यह संदेश देने का प्रयास शुरू कर दिया है कि उनके हित भाजपा में ही सुरक्षित हैं।
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यूपी में लंबे अर्से से कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं हुआ है। यादव समाज पर अपना हक समझने वाली सपा जब भी सत्ता में आई सरकार की कमान नेतृत्व वाले परिवार में ही रही है। ऐसे में यूपी में ब्राह्मण डिप्टी सीएम के बाद राजस्थान में सीएम बनाकर पार्टी इस समाज को यह संदेश देने में जुट गई है कि उनका सम्मान भाजपा में ही है।
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मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यादव समाज से सीएम बनाकर यूपी में यादव समाज को बताना शुरू कर दिया गया है कि भाजपा में कोई भी किसी भी पद पर पहुंच सकता है, चाहे वह यादव ही क्यों न हो। यह भी बताया जा रहा है कि यादव समाज सपा में नेतृत्व का पद तो कभी नहीं पा सकता। जब भी ऐसा अवसर आएगा, अखिलेश यादव या उनका परिवार ही मौका पाएगा।
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यूपी में आदिवासी मतदाताओं की संख्या तो ज्यादा नहीं है, लेकिन पूर्वांचल की कुछ सीटों को यह समुदाय प्रभावित करता है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से सीएम बनाकर पार्टी ने दलितों-आदिवासियों को यह संदेश देने का प्रयास शुरू कर दिया है कि उनके हित भाजपा में ही सुरक्षित हैं।
सियासी प्रयोग का फायदा उठाने की रणनीति
पार्टी लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण, यादव व आदिवासी समाज के बीच अपने सियासी प्रयोग का फायदा उठाना चाहती है। पार्टी ने तीनों जातियों से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इसके लिए सक्रिय कर दिया है। यादव समाज से जुड़े नेता और पदाधिकारी जहां मोहन यादव को सीएम बनाने के लिए पीएम मोदी का आभार जताते हुए पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स के जरिये इसका प्रचार कर रहे हैं।
पार्टी लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण, यादव व आदिवासी समाज के बीच अपने सियासी प्रयोग का फायदा उठाना चाहती है। पार्टी ने तीनों जातियों से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इसके लिए सक्रिय कर दिया है। यादव समाज से जुड़े नेता और पदाधिकारी जहां मोहन यादव को सीएम बनाने के लिए पीएम मोदी का आभार जताते हुए पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स के जरिये इसका प्रचार कर रहे हैं।
वहीं ब्राह्मण समाज के नेता भी अपने समाज के बीच भजनलाल शर्मा को सीएम बनाने के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार जता रहे हैं। जनजाति प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता भी विष्णुदेव साय के जरिए जनजाति समुदाय को साधने का प्रयास कर रहे हैं।
नेता और जनप्रतिनिधि समाज को बता रहे हैं कि भाजपा ने ही उनके समाज को उचित नेतृत्व दिया है। अब इन समाजों के सामाजिक संगठनों के जरिये भी इसके लिए पीएम मोदी और भाजपा नेतृत्व का आभार प्रकट कराने की तैयारी है। यादव महासभा ने तो मोहन यादव को सीएम बनाने के लिए भाजपा का आभार भी जता चुकी है।