आम बजट पर खास नजर : उत्तर प्रदेश के विपक्षी दल भी बजट को देखकर बनाएंगे रणनीति, सत्तापक्ष मान रहा गेमचेंजर होगा बजट
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विस्तार
विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच एक फरवरी को आ रहे आम बजट पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें हैं। केंद्र के बजट का अंदाजा लगाने के बाद ही चुनाव घोषणापत्रों को अंतिम रूप देने की संभावना जताई जा रही है। अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इनमें से यूपी सबसे बड़ा राज्य है। इस राज्य में हार-जीत का केंद्र तक असर पड़ने की संभावना है। यहां सत्ताधारी दल भाजपा व मुख्य प्रतिपक्षी दल सपा सत्ता में वापसी के लिए हर कोशिश में जुटे हैं।
बसपा, कांग्रेस व आप अपनी सियासी हैसियत सुधार कर सत्ता समीकरण में मुख्य भूमिका निभाने के लिए प्रयासरत हैं। ये दल जातियों पर पकड़ रखने वाले रसूखदार नेताओं का दल-बदल कराने, टिकट वितरण में सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखने के साथ टुकड़ों-टुकड़ों में लुभावनी घोषणाएं भी कर रहे हैं। पर, पहले चरण के नामांकन शुरू होने के बावजूद किसी भी दल ने अभी तक अपना घोषणापत्र जारी नहीं किया है। जानकार बताते हैं कि आम बजट में केंद्र सरकार राज्य विशेष के लिए परियोजनओं के एलान के साथ लाभ वाली चालू योजनाओं का आवंटन बढ़ाकर पार्टी की सत्ता वाले राज्यों को फायदा पहुंचा सकती हैं। कोई नई योजना लाकर भी माहौल बदला जा सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि 2009 के आम चुनाव से पहले मनरेगा योजना का एलान तत्कालीन यूपीए सरकार के लिए गेमचेंजर साबित हुई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किसान सम्मान निधि का एलान मोदी सरकार के लिए गेमचेंजर साबित हुआ था। कोविड काल में मुफ्त राशन वितरण से गरीब तबका काफी राहत महसूस कर रहा है। लेकिन, हाल में दलबदल से जिस तरह माहौल गर्माया है, उससे चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। ऐसे में सत्ताधारी दल आम बजट के जरिये किसी गेमचेंजर पहल के साथ सामने आए, तो कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी। पार्टी के कार्यकर्ता प्रचार कर रहे हैं कि केंद्रीय बजट में किसानों व महिलाओं से जुड़ी बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश अनुपूरक बजट में किसान सम्मान निधि बढ़ाने पर विचार कर रहा था, लेकिन केंद्र से उम्मीद में टाल दिया गया। यही वजह है कि विपक्षी दल भी बजटीय दांव का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उसकी काट के तौर पर अपने घोषणापत्र में व्यवस्था की जा सके।
लघु उद्योगों के प्रोत्साहन और असंगठित श्रमिकों पर फोकस संभव
इंडियन इकनॉमिक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय कहते हैं, केंद्रीय बजट पूरे देश के लिए होता है। कोविड महामारी में रोजगार व श्रमिकों के पलायन की गंभीर चिंता सामने आई है। इसलिए आम बजट का फोकस स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर रहने की संभावना है। लघु उद्योगों के प्रोत्साहन व असंगठित श्रमिकों के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।
चालू योजनाओं का आवंटन बढ़ाकर भी कर सकते हैं आकर्षित
अर्थशास्त्री प्रो. एनएमपी वर्मा कहते हैं, अर्थव्यवस्था महामारी के दौर से गुजर रही है। इसलिए आम बजट चुनाव की जगह महामारी को ध्यान में रखकर ही लाए जाने की संभावना है। स्वास्थ्य सेक्टर में बजट का आवंटन बढ़ने की संभावना है। सरकार लोकप्रिय योजनाओं के लिए अधिक बजट का आवंटन कर सकती है। प्रधानमंत्री की बजट पूर्व घोषणाओं के लिए आवंटन हो सकता है। इनमें यदि राज्य विशेष से जुड़े प्रोजेक्ट होंगे तो उसका भी सीधा लाभ संबंधित राज्य पाएंगे। ग्रामीण सेक्टर, खासतौर से आवास व पेंशन जैसी योजनाओं पर फोकस हो सकता है। किसानों के लिए 6000 रुपये वार्षिक काफी आकर्षक राशि है। इसमें वृद्धि की संभावना नजर नहीं आती है।
केंद्रीय बजट का असर तो दिखेगा ही
अर्थशास्त्री प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि केंद्र सरकार राज्य विशेष के लिए कोई योजना तो नहीं ला सकती, लेकिन आवंटन बढ़ाकर या देशभर के लिए नई स्कीम के जरिये सर्वाधिक लाभ उठाने का अवसर दे सकती है। मुफ्त अनाज, आयुष्मान व किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से यूपी में एक असरदार लाभार्थी वर्ग तैयार हो गया है। क्योंकि, केंद्र व राज्य में एक समान मत वाली सरकार होने का लाभ मिला है।
भाजपा को भी बजट का इंतजार
भाजपा भी अपना घोषणा पत्र जारी करने से पहले केंद्रीय बजट का इंतजार कर रही है। प्रदेश सरकार ने विपक्षी दलों के कई वादों की ताकत कम करने से जुड़ी घोषणाएं जरूर की हैं। नलकूप से सिंचाई के लिए किसानों की बिजली बिल का भुगतान आधा कर दिया गया है। फील्ड के कई संवर्गों में कार्यरत संविदा कार्मिकों के मानदेय बढ़ाए गए हैं। निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगों व बुजुर्गों की पेंशन राशि 500 से बढ़ाकर 1000 की जा चुकी है। आठ लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की गई है। असंगठित श्रमिकों को 1000-1000 रुपये की दो किस्तें देने का एलान किया गया है। करीब ढाई करोड़ को पहली किस्त भेजी जा चुकी है।
सपा की घोषणाएं : कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल करेंगे। 300 यूनिट मुफ्त बिजली। मुफ्त सिंचाई। गरीब छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का इंतजाम। 15 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान, सभी फसलों की एमएसपी। सत्ता में आने पर जातिगत जनगणना। छात्रों को लैपटॉप मिलेगा।
कांग्रेस की घोषणाएं : महिलाओं को टिकट में 40 प्रतिशत आरक्षण। नौकरियों में महिलाओं को 40 प्रतिशत नियुक्ति। महिलाओं को फ्री बस सेवा, टैक्स में छूट। 12वीं पास छात्राओं को स्मार्टफोन, स्नातक को स्कूटी। पुलिस में 25 प्रतिशत नौकरियां महिलाओं को। किसानों की कर्जमाफी।