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Lucknow News: छात्रों के धरने को सपा विधायक व पूर्व कुलपति का मिला समर्थन
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छात्रों के धरने को सपा विधायक व पूर्व कुलपति का मिला समर्थन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी छात्र निष्कासन की कार्रवाई वापस लेने, निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने और बढ़ी हुई फीस तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन को विपक्षी पार्टी के नेताओं और विवि के पूर्व पदाधिकारियों का भी समर्थन मिल रहा है। सोमवार को सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा और सपा नेता शर्मिला महाराज के अलावा लविवि की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा भी छात्रों से मिलने पहुंचीं।
विधायक रविदास मेहरोत्रा ने छात्रों की समस्याओं को सुना और उनकी न्यायपूर्ण मांगों का समर्थन किया। विधायक ने कुलपति से छात्र नेताओं का निष्कासन तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि निष्कासन वापस न होने पर वे सड़क से सदन तक छात्रों की आवाज उठाएंगे। लविवि की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा ने भी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लोकतांत्रिक मूल्यों और संवाद का संस्थान है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नीरज जैन ने भी निष्कासन को अन्यायपूर्ण बताया।
छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। वे शिक्षा के अधिकार और छात्र हितों के लिए आवाज उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की ओर से की गई निष्कासन की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। फीस वृद्धि ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। धरने में निष्कासित छात्र प्रेम प्रकाश यादव, शशि प्रकाश और हर्षित शुक्ला के अलावा अन्य छात्र भी मौजूद रहे।
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विधायक रविदास मेहरोत्रा ने छात्रों की समस्याओं को सुना और उनकी न्यायपूर्ण मांगों का समर्थन किया। विधायक ने कुलपति से छात्र नेताओं का निष्कासन तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि निष्कासन वापस न होने पर वे सड़क से सदन तक छात्रों की आवाज उठाएंगे। लविवि की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा ने भी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लोकतांत्रिक मूल्यों और संवाद का संस्थान है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नीरज जैन ने भी निष्कासन को अन्यायपूर्ण बताया।
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छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। वे शिक्षा के अधिकार और छात्र हितों के लिए आवाज उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की ओर से की गई निष्कासन की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। फीस वृद्धि ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। धरने में निष्कासित छात्र प्रेम प्रकाश यादव, शशि प्रकाश और हर्षित शुक्ला के अलावा अन्य छात्र भी मौजूद रहे।
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