यूपी चुनाव में सपाइयों ने अखिलेश से 'धोखा' कर की थी भाजपाइयों की मदद
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समाजवादी पार्टी की पारिवारिक लड़ाई थमने के बजाय बढ़ती जा रही है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को इटावा, मैनपुरी और कन्नौज समेत यादव लैंड कहे जाने वाले 8 जिलों के प्रत्याशियों व नेताओं के साथ बैठक कर विधानसभा चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा की।
इन जिलों के नेताओं ने खुलासा किया कि पार्टी के कुछ लोग सपा प्रत्याशियों के खिलाफ भाजपा का समर्थन कर रहे थे। उनका इशारा कुछ बड़े नेताओं की तरफ है।
सपा को इस बार मुलायम सिंह का गढ़ कहे जाने वाले मध्य यूपी के जिलों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इन जिलों में यादव मतदाता राजनीतिक उलटफेर करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वर्ष 2012 के चुनाव में सपा को इन जिलों में एकतरफा कामयाबी मिली थी। इस बार नतीजे निराशानजक रहे। चुनावी समीक्षा के क्रम में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, मैनपुरी, फिरोजाबाद, कन्नौज, एटा व कासगंज जिले के प्रत्याशियों तथा प्रमुख नेताओं से मुलाकात की।
बड़े नेताओं ने किया पार्टी विरोधी आचरण
कई प्रत्याशियों व नेताओं ने भितरघात को हार की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं पर पार्टी विरोधी आचरण करने का आरोप लगाया। यहां तक कहा कि उन्हें हराने के लिए पार्टी के नेताओं ने काम किया।
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि विधानसभा चुनाव की समीक्षा में यह तथ्य उजागर हुआ है कि दल के ही कुछ लोगों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सपा के उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा को समर्थन दिया।
पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों का विरोध कर अनुशासनहीनता करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए युवा संगठनों सहित सभी फ्रंटल संगठनों और जिला, शहर इकाइयों को सक्रिय बनाने की कार्ययोजना बन रही है। 15 अप्रैल से सदस्यता अभियान की तैयारी भी जोर-शोर से की जा रही है।
भितरघातियों, भगवा साजिशों से संघर्ष को तैयार रहना होगा
चौधरी ने कहा, पार्टी के लोगों का मानना है कि मौजूदा राजनीति में मूल्यों और आदर्शों की जगह छिछलापन प्रभावी हो गया है। ऐसे में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए और संघर्ष करना जरूरी हो गया है।
सामाजिक एकता और सद्भाव को बचाए रखने के लिए लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद से प्रतिबद्ध सभी लोगों को एकजुट होना होगा। भितरघाती तत्वों, सांप्रदायिक, विघटनकारी एवं भगवा राजनीति की साजिशों के खिलाफ भी संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।
अखिलेश की छवि बेदाग
चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव की छवि आज भी बेदाग है। उन्होंने जनहित की तमाम योजनाएं लागू कर उन्होंने प्रदेश को विकास की नई मंजिलों पर पहुंचाया है। करोड़ों नौजवान अखिलेश में अपना भविष्य देखते हैं। आज भी वे किसानों की आशा है।
सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश ने प्रदेश की समस्याओं को गहराई से समझा है। बतौर मुख्यमंत्री उनका कार्यकाल पारदर्शी, ईमानदार और लोकहितैषी रहा है। सांप्रदायिक और संकीर्ण तत्वों का उन्होंने डटकर विरोध किया है।
जिला इकाइयां भी बताएंगी हार की वजह
अखिलेश यादव लगातार हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं। वे प्रत्याशियों और जिला स्तरीय नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इसी के साथ जिला इकाइयों से भी हार की वजह जानी जाएगी।
इसके लिए उनसे विधानसभा क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। कुछ जिला इकाइयों ने खुद भी हार के कारण तलाशे हैं।
इनसे प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा। हार की समीक्षा के बाद सपा में कई बड़े नेताओं पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।