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माननीय के लिए सांसत में कप्तान
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 02 Jul 2014 10:40 AM IST
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एक जिले के कप्तान को इसलिए हटना पड़ा क्योंकि अदालत के आदेश पर उनके जिले के एक थाने में एक मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया।
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मुकदमा दर्ज होने पर मंत्रीजी भड़के, बात ऊपर तक गई और कप्तान साहब आड़े हाथ लिए गए। कप्तान साहब ने हाथ-पैर जोड़े, अदालत के आदेश की दुहाई दी और आनन-फानन में मुकदमा खारिज करवा दिया।
इतना करने के बाद कप्तान साहब मुतमईन हो गए थे, पर मंत्रीजी की नाराजगी बनी रही। मंत्री की मूंछों पर बात आने की वजह से आलाकमान को भी अगले ही दिन कप्तान को हटाने का आदेश जारी करना पड़ा।
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संदेश यह था कि आगे से जिलों के कप्तान हैसियत में रहकर कार्रवाई करें। लेकिन कप्तानों में बेचैनी इस बात की है कि मूंछें देखें या अदालत के आदेश को।
मुकदमा दर्ज नहीं करते हैं तो अदालत के दोषी और दर्ज करते हैं तो मूंछों पर बात। नुकसान दोनों ही स्थितियों में। ऐसे में कप्तान सांसत में हैं, वह क्या करें क्या न करें।
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