राज्यसभा चुनाव: सपा का यादव-मुस्लिम समीकरण पर दांव
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समाजवादी पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले में यादव और मुसलमान समीकरण को मजबूत माना है। इसी पर दांव लगाते हुए राज्यसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशियों में दो यादव और दो मुसलमान चुने गए हैं।
यही दोनों सपा के बेस वोटर माने जाते हैं। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोटों को लेकर विधानसभा चुनाव 2017 में मारामारी होनी है। सपा ने अभी से उसकी तैयारी शुरू कर दी है। सपा ने कुर्मी व राजपूत से समाज से एक-एक प्रत्याशी उतारा है।
राज्यसभा की जिन दस सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें सपा ने छह सीटों के लिए उम्मीदवार उतारे हैं। प्रत्याशी घोषित करते समय अपने हिसाब से जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है।
सर्वाधिक जोर पिछड़ों और मुसलमानों, खासतौर से यादव-मुस्लिम पर रहा है। यही वजह है कि रामगोपाल यादव के साथ ही झांसी के प्रमुख नेता चंद्रपाल सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। चंद्रपाल, मुलायम सिंह के नजदीकी हैं और संगठन में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। वह पिछला लोकसभा चुनाव झांसी सीट से हार गए थे।
पहले मना किया, फिर दिया टिकट
पश्चिमी यूपी के दो पड़ोसी जिलों संभल और रामपुर से दो मुस्लिम प्रत्याशियों जावेद अली खान और डॉ. तंजीन फातिमा को राज्यसभा भेजने का फैसला लेकर सपा ने मुस्लिम कार्ड खेला है। जावेद, सपा महासचिव रामगोपाल यादव के करीबी माने जाते हैं।
सपा ने उन्हें संभल से लोकसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया था, लेकिन ऐन वक्त पर आजम खां की सिफारिश पर उनका टिकट काटकर शफीकुर्रहमान बर्क को मैदान में उतार दिया था। छह में चार सीटों पर यादव-मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर सपा ने विधानसभा चुनाव 2017 के समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
पिछड़े वर्गों को जोड़ने का संदेश देने के लिए लखीमपुर खीरी की राजनीति में वजनदार माने जाने वाले रवि प्रकाश वर्मा को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है। रवि प्रकाश खुद तीन बार सांसद रह चुके हैं। उनके पिता और पत्नी भी सांसद रहे हैं। हाल ही में लखीमपुर के निघासन उपचुनाव में जीते कृष्ण कुमार पटेल भी उनके नजदीकी रिश्तेदार हैं। इस उपचुनाव को जिताने में भी रवि प्रकाश की अहम भूमिका रही थी।
छठे उम्मीदवार नीरज शेखर बलिया के पूर्व सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र हैं। उन्हें प्रत्याशी बनाकर सपा मुखिया ने चंद्रशेखर से नजदीकी रिश्तों का सम्मान किया और राजपूतों में संदेश देने की भी कोशिश की है।
ये थी आजम की मर्जी
सपा के हलकों में चर्चा है कि आजम खां चाहते थे कि रामपुर से चुनाव हारने वाले नसीर अहमद खां या संभल से मामूली वोटों से पराजित हुए शफीकुर्रहमान बर्क को राज्यसभा में भेजा जाए।
ऐसा माना जा रहा है कि जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और संभल के पूर्व जिलाध्यक्ष जावेद की राज्यसभा के लिए दावेदारी आजम खां की मर्जी के खिलाफ थी, लिहाजा उन्हें संतुष्ट रखने केलिए उनकी पत्नी डॉ. तंजीन को प्रत्याशी बनाया गया है।