झटका: बिखर गईं अखिलेश और माया की उम्मीदें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी सपा और मुख्य विपक्षी दल बसपा की उम्मीदों को महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा के चुनावों से झटका लगा है। सपा महाराष्ट्र में चार से घटकर एक सीट पर पहुंच गई।
बसपा हरियाणा में किसी तरह पिछली बार की तरह एक विधायक बरकरार रखने में सफल रही। इन राज्यों में खास सफलता न मिलने से दोनों ही पार्टियों की सूबे से बाहर पैर पसारने की योजना विफल हो गई है।
लोकसभा चुनावों में सपा और बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। मायावती ने लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र व हरियाणा की सभी सीटों पर अपने दम पर लड़ने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने दोनों ही राज्यों में लगभग सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे। तैयारी की गंभीरता दिखाने के लिए मायावती ने हरियाणा में ब्राह्मण मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद शर्मा का चेहरा आगे किया।
उन्होंने हरियाणा में चार और महाराष्ट्र में आठ चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया। मगर नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे। 2009 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने हरियाणा में 86 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसे एक सीट पर जीत मिली थी और कुल मिलाकर प्रदेश में करीब 639096 वोट मिले थे। लड़ी गई सीटों पर उसे करीब 7.05 प्रतिशत वोट भी मिले थे। इस चुनाव में भी बसपा किसी तरह एक सीट ही बचा पाई है। उसका वोट प्रतिशत भी कम हो गया।
सपा ने 24 सीटों पर खड़े किए थे प्रत्याशी
उधर, राष्ट्रीय दल की छवि बनाने के लिए बेचैन सपा ने हरियाणा में तो उम्मीदवार नहीं उतारे लेकिन महाराष्ट्र में 24 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे। सपा की योजना तो ज्यादा सीटें लड़ने की थी लेकिन ऐन वक्त पर कांग्रेस से गठबंधन टूटने के कारण ज्यादा उम्मीदवारों के पर्चे दाखिल नहीं हो सके।
सपा को 24 में केवल एक सीट मिल पाई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई मंत्री महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए गए लेकिन पार्टी की स्थिति में सुधार नहीं ला पाए।
पिछली बार सपा ने 31 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और वह चार सीट जीतने में सफल रही थी। सपा के वोट बैंक में भी गिरावट आई है।
वर्ष 2009 में सपा ने हरियाणा में 24 प्रत्याशी खड़े किए थे लेकिन इस बार इंडियन नेशनल लोकदल का समर्थन किया था। पीडब्लूडी और सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव कुछ सीटों पर इनेलो के प्रचार के लिए हरियाणा गए भी थे।