सपा सरकार में बनी कंपनी सदर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन होगी बंद
- योगी सरकार सदर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लि. को बंद करने जा रही है
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इनर्जी टास्क फोर्स ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
- वर्ष 2013 में बनाई गई थी कंपनी, एसपीवी के रूप में कर रही थी काम
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प्रदेश सरकार सदर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लि. को बंद करने जा रही है। इससे जुड़े प्रस्ताव को मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता वाली इनर्जी टास्क फोर्स ने मंजूरी दे दी है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घाटमपुर व जवाहरपुर तापीय परियोजना के सापेक्ष विद्युत पारेषण से संबंधित कार्यों के लिए राज्य सरकार ने आठ अगस्त 2013 को यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की स्थापना की थी। यह कंपनी तापीय परियोजनाओं से विद्युत निकासी के लिए उपकेंद्र निर्माण करने वाले विकासकर्ता चयन में एक स्पेशल परपज व्हीकिल की भूमिका अदा कर रही थी।
लेकिन, जब तीन गुणा 660 मेगावाट घाटमपुर तापीय परियोजना से विद्युत निकासी के लिए पारेषण लाइनों के निर्माण के लिए ट्रांसमिशन प्रोवाइडर के रूप में कंपनी चयन की बात आई तो नए विचार सामने आ गए। टांसमिशन प्रोवाइडर के रूप में आरईसी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स कंपनी नई दिल्ली व यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के अधिकारियों के बीच वार्ता में आरईसी ने पारेषण निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए वर्तमान स्पेशल परपज व्हीकिल सदर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की सेवाएं लेने के बजाय एक नए स्पेशल परपज व्हीकिल के निर्माण की राय दी। यहीं से सदर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन की बंदी की उलटी गिनती शुरू हो गई।
इसके बाद यूपी पॉवर कार्पोरेशन लि. व सदर्न यूपी के निदेशक मंडल ने अलग-अलग सदर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया था। बीते 25 सितंबर को संपन्न इनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में इस कंपनी की आवश्यकता अब न होने का हवाला देकर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। मुख्य सचिव ने कंपनीज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार कंपनी बंद करने की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। खास बात ये है कि इस कंपनी को बंद करने की कार्यवाही सपा शासनकाल में ही शुरू हो गई थी। मौजूदा सरकार इसे अंजाम तक पहुंचाने जा रही है।
मेरठ, सिंभावली, रामपुर व संभल में नए तकनीक के सब स्टेशन, कैबिनेट मंजूरी जल्द
इनर्जी टास्क फोर्स ने मेरठ व सिंभावली तथा रामपुर व संभल में उच्चशक्ति वाले गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन (जीआईएस) की स्थापना के लिए विकासकर्ता के चयन प्रस्तावों पर मुहर लगाते हुए कैबिनेट की मंजूरी लेने का निर्देश दिया है। मेरठ व रामपुर में 765-765 केवी तथा सिंभावली व संभल में 400-400 केवी जीआईएस उपकेंद्र की स्थापना की जानी है। टैरिफ बेस्ड कांप्टेटिव बिडिंग (टीबीसीबी) के जरिए इनके निर्माणकर्ताओं के चयन की कार्यवाही की गई।
मेरठ व सिंभावली सब स्टेशन की स्थापना के लिए तीन निर्माणकर्ताओं ने बिड प्रक्रिया में हिस्सा लिया। ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया, अडानी ट्रांशमिशन व टोरंट पॉवर। इनमें न्यूनतम बोलीदाला ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया रहा। यह दोनों सब स्टेशन व संबंधित लाइनों का निर्माण 115 करोड़ 9 लाख 9 हजार रुपये में कराएगा। रामपुर व संभल सब स्टेशन की स्थापना से जुड़ी बिड प्रक्रिया में ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया व टोरंट पॉवर ने ही हिस्सा लिया। इसमें भी ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया अव्वल रहा। इन दोनों प्रोजेक्ट का निर्माण 102 करोड़ 9 लाख 17 हजार में होगा। इन चारों ही प्रोजेक्ट के निर्माणकर्ता के रूप में ग्रिड कार्पोरेशन के नाम की मंजूरी का प्रस्ताव जल्दी ही कैबिनेट के समक्ष रखने की तैयारी है।
जलीय परियोजनाओं से 700 की जगह 400 मेगावाट बिजली खरीदेंगे
पॉवर कार्पोरेशन ने जलीय परियोजनाओं से 700 मेगावाट के दीर्घकालीन विद्युत क्रम प्रस्ताव रखा था। लेकिन विद्युत नियामक आयोग ने बिड क्वांटम को 700 की जगह घटाकर 400 मेगावाट तय कर बिड कार्यवाही की सहमति दी थी। ईटीएफ ने 400 मेगावाट बिजली खरीदने की बिडिंग कार्यवाही पूरी करने की मंजूरी दे दी है। एक मई 2020 से खरीदी गई बिजली की आपूर्ति होगी।
सोनभद्र, भदोही और वाराणसी में उपकेंद्र व लाइनों के निर्माण प्रस्ताव पर मुहर
वर्तमान पारेषण तंत्र के सुदृढ़ीकरण के मद्देनजर 220 केवी के दो तथा 132 केवी के एक उपकेंद्र के निर्माण प्रस्ताव को भी सहमति दे दी गई है। 220 केवी के उपकेंद्र म्योरपुर सोनभद्र व भदोही तथा 132 केवी का उपकेंद्र अलईपुर वाराणसी के साथ इनसे जुड़ी लाइनों का निर्माण होगा। इन उपकेंद्रों को संबंधित क्षेत्रों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनवाया जाना है। इस पर खर्च होने वाली रकम का 70 प्रतिशत हिस्सा ऋण से जुटाया जाएगा। 30 प्रतिशत शासकीय अंशपूंजी लगाई जाएगी।