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Lucknow News: दिल्ली में रहते हुए भी दिल से जुड़ी रहीं सोनिया
Fri, 16 Feb 2024 02:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 16 Feb 2024 02:32 AM IST
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रायबरेली। सास की राजनीतिक विरासत को सोनिया गांधी ने बखूबी संभाला। रायबरेली की लाडली बहू का क्षेत्र से रिश्ता धीरे-धीरे प्रगाढ़ होता गया। दिल्ली में रहकर भी उन्होंने खुद को यहां से जोड़े रखा। जड़ों से जुड़ी रहीं। हर सुख-दुख में साथ खड़ी रहीं। अब वह राजस्थान से राज्यसभा जा रही हैं तो समर्थक दुखी हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो सोनिया को मनाने दिल्ली तक पहुंच गए।
ऐसे में सोनिया ने भी उनकी भावनाओं का पूरा सम्मान किया और अपनत्व जताने के लिए बरेली के नाम पत्र लिख जताया कि चाहे जहां भी रहें, उनका रायबरेली से जुड़ाव सदा रहेगा। पूर्ववत ही रहेगा। सांसद सोनिया गांधी का जनता से लगाव ही था कि वह रायबरेली को अपना घर मानती थीं। जनता के बीच जाकर न सिर्फ पारिवारिक रिश्ते का जिक्र करतीं, बल्कि घर की ड्यूढ़ी तक पहुंचकर लोगों के दुख-दर्द को भी सुनती थीं।
यही वजह रही कि जब किसी जरूरतमंद का उपचार पैसे के बिना प्रभावित हुआ तो उसे दिल्ली बुलाकर खुद के खर्च पर इलाज भी कराया।
गांधी परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि को आगे बढ़ाते हुए सोनिया यहां से वर्ष 2004 में चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। इसके बाद जब भी उनका रायबरेली आगमन होता, तब वह गांवों में जाना नहीं भूलतीं। ग्रामीणों के बीच बैठना नहीं भूलतीं। गांवों में चौपाल भी लगाती थीं।
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इस दौरान कोई पक्का आवास, पेंशन तो कोई बिजली, सिंचाई की समस्या बताता था। उस समय यूपीए की सरकार भी केंद्र में थी। ऐसे में वह समस्याओं को प्राथमिकता के तौर पर दूर कराती थीं। केंद्रीय मंत्रियों का भी यहां डेरा लगा रहता था।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स की स्थापना कराकर सोनिया ने संसदीय क्षेत्र की जनता को सेहतमंद रखने का प्रयास किया। महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए शीना होम टेक्सटाइल शुरू कराया। इसमें दरी बनाने का कार्य होता था, लेकिन केंद्र में यूपीए सरकार जाने के बाद यह टेक्सटाइल बंद हो गई।
युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए लालगंज में रेल कोच फैक्टरी की स्थापना कराई। वर्ष 2004 से लेकर 2014 तक जिले में पेयजल का संकट रहता था। हैंडपंप लगवाने के साथ उन्होंने गांवों में अपनी निधि से वाटर पंप लगवाने का काम किया।
यहां पर सिर्फ रायबरेली ही नहीं, बल्कि अमेठी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, फतेहपुर समेत अन्य जनपदों के लोगों से मिलकर उनकी समस्या सुनकर निराकरण कराती थीं। सोनिया गांधी की तरह यहां की जनता का भी उनसे लगाव था। यही वजह है कि जब सोनिया चुनाव मैदान में उतरीं, जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया।
2019 का वह भावुक संदेश
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भुएमऊ गेस्ट हाउस में पहली बार सोनिया गांधी यहां पहुंचीं। अपने भाषण के जरिए उन्होंने जनता से खुद का पारिवारिक रिश्ता जोड़ते हुए सभी को भावुक कर दिया।
और अटल जी से की बात
वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीके शुक्ला पहले इंदिरा गांधी और फिर सोनिया गांधी से जुड़े रहे। वह बताते हैं कि वर्ष 2003 में केंद्र में एनडीए सरकार थी, जिले की आईटीआई फैक्टरी को बेचने की तैयारी की जा रही थी। यह बात सोनिया के पास पहुंची तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी से बात करके फैक्टरी न बेचने का आग्रह किया। सोनिया की बात पर आईटीआई फैक्टरी बिकने से बच गई।
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ऐसे में सोनिया ने भी उनकी भावनाओं का पूरा सम्मान किया और अपनत्व जताने के लिए बरेली के नाम पत्र लिख जताया कि चाहे जहां भी रहें, उनका रायबरेली से जुड़ाव सदा रहेगा। पूर्ववत ही रहेगा। सांसद सोनिया गांधी का जनता से लगाव ही था कि वह रायबरेली को अपना घर मानती थीं। जनता के बीच जाकर न सिर्फ पारिवारिक रिश्ते का जिक्र करतीं, बल्कि घर की ड्यूढ़ी तक पहुंचकर लोगों के दुख-दर्द को भी सुनती थीं।
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यही वजह रही कि जब किसी जरूरतमंद का उपचार पैसे के बिना प्रभावित हुआ तो उसे दिल्ली बुलाकर खुद के खर्च पर इलाज भी कराया।
गांधी परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि को आगे बढ़ाते हुए सोनिया यहां से वर्ष 2004 में चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। इसके बाद जब भी उनका रायबरेली आगमन होता, तब वह गांवों में जाना नहीं भूलतीं। ग्रामीणों के बीच बैठना नहीं भूलतीं। गांवों में चौपाल भी लगाती थीं।
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इस दौरान कोई पक्का आवास, पेंशन तो कोई बिजली, सिंचाई की समस्या बताता था। उस समय यूपीए की सरकार भी केंद्र में थी। ऐसे में वह समस्याओं को प्राथमिकता के तौर पर दूर कराती थीं। केंद्रीय मंत्रियों का भी यहां डेरा लगा रहता था।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स की स्थापना कराकर सोनिया ने संसदीय क्षेत्र की जनता को सेहतमंद रखने का प्रयास किया। महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए शीना होम टेक्सटाइल शुरू कराया। इसमें दरी बनाने का कार्य होता था, लेकिन केंद्र में यूपीए सरकार जाने के बाद यह टेक्सटाइल बंद हो गई।
युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए लालगंज में रेल कोच फैक्टरी की स्थापना कराई। वर्ष 2004 से लेकर 2014 तक जिले में पेयजल का संकट रहता था। हैंडपंप लगवाने के साथ उन्होंने गांवों में अपनी निधि से वाटर पंप लगवाने का काम किया।
यहां पर सिर्फ रायबरेली ही नहीं, बल्कि अमेठी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, फतेहपुर समेत अन्य जनपदों के लोगों से मिलकर उनकी समस्या सुनकर निराकरण कराती थीं। सोनिया गांधी की तरह यहां की जनता का भी उनसे लगाव था। यही वजह है कि जब सोनिया चुनाव मैदान में उतरीं, जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया।
2019 का वह भावुक संदेश
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भुएमऊ गेस्ट हाउस में पहली बार सोनिया गांधी यहां पहुंचीं। अपने भाषण के जरिए उन्होंने जनता से खुद का पारिवारिक रिश्ता जोड़ते हुए सभी को भावुक कर दिया।
और अटल जी से की बात
वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीके शुक्ला पहले इंदिरा गांधी और फिर सोनिया गांधी से जुड़े रहे। वह बताते हैं कि वर्ष 2003 में केंद्र में एनडीए सरकार थी, जिले की आईटीआई फैक्टरी को बेचने की तैयारी की जा रही थी। यह बात सोनिया के पास पहुंची तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी से बात करके फैक्टरी न बेचने का आग्रह किया। सोनिया की बात पर आईटीआई फैक्टरी बिकने से बच गई।