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Lucknow News: मोटापे के साथ खर्राटे, दिन में नींद आए तो करा लें स्लीप स्टडी

Sun, 22 Sep 2024 06:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2024 06:26 AM IST
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Snoring with obesity, if you feel sleepy during the day then get a sleep study done.
लखनऊ। मोटे लोगों को खर्राटों की समस्या हो और वे दिन में सो जाते हैं तो उन्हें स्लीप स्टडी करानी चाहिए। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में अब इसकी सुविधा उपलब्ध है। विभाग में शनिवार को डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशनल पल्मोनरी मेडिसिन यूनिट के उद्घाटन पर संस्थान के निदेशक प्रो. चंद्र मोहन सिंह ने यह जानकारी दी।
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निदेशक ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। मोटे लोगों को रात में खर्राटे आने की समस्या होती है, लेकिन लोग इसे गहरी नींद का संकेत मानते हैं। इसका इलाज न कराने पर दिल का दौरा, अनियंत्रित बीपी, मधुमेह, हड्डियों की कमजोरी जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
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मौके पर डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह, कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. ज्योत्सना अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार सिंह, प्रो. सूर्यकांत, प्रो. वेद प्रकाश, डॉ. अनिकेत रस्तोगी, डॉ. सागर जैन, मनीष और सुमन मौजूद रहे।
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ये सुविधाएं मिलेंगी

पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख और नवनिर्मित यूनिट के प्रभारी डॉ. हेमंत कुमार ने बताया कि यह यूनिट सांस संबंधी बीमारियों की पहचान में बड़ी भूमिका निभाएगी। इसमें स्पायरोमेट्री, इम्पल्स ऑसिलॉमेट्री, बॉडी प्लेथिस्मोग्राफी (बॉडी बॉक्स), स्लीप लैब, ब्रोंकोस्कोपी सूट, और थोराकोस्कोपी सूट शामिल है।



स्लीप लैब

इस लैब में नींद से संबंधित श्वसन विकारों का अध्ययन कर उनका प्रारंभिक निदान और इलाज किया जाएगा।



ब्रोंकोस्कोपी सूट



ब्रोंकोस्कोपी वायुमार्गों जैसे ट्रेकिया, श्वसन नली और फेफड़ों को सीधे तरीके से देखता है। इसमें नाक या मुंह से एक लचीला ब्रोंकोस्कोप डालकर श्वसन पथ की जांच की जाती है, ताकि ट्यूमर, संक्रमण, सूजन का पता लगाया जा सके। इससे बायोप्सी के लिए टिश्यू जमा करने के साथ कैंसर, टीबी और फेफड़े की अन्य बीमारियों का निदान किया जाएगा।


थोरोकोस्कोपी

थोरोकोस्कोपी में छाती में एक छोटे से चीरे से थोरोकोस्कोप डालकर प्लूरल या फेफड़ों के टिश्यू की बायोप्सी की जाती है। इससे प्लूरल रोगों जैसे घातक ट्यूमर, संक्रमण आदि का इलाज किया जाता है।

वहीं, एडवांस पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) लैब में फेफड़ों की कार्यक्षमता जांची जाती है।
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