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Lucknow News: खर्राटे से हो सकती है दिल, दिमाग, बीपी और शुगर की समस्या

Mon, 23 Feb 2026 02:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:21 AM IST
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Snoring can cause problems related to heart, brain, blood pressure and sugar.
कार्यक्रम में मौजूद लोग।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि सही समय पर इलाज न होने पर खर्राटों की वजह से दिल, दिमाग, बीपी और शुगर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वह रविवार को को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में इंडियन चेस्ट सोसाइटी और स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसायटी के सहयोग से स्लीप सर्टिफिकेशन पर हुई कार्यशाला में बोल रहे थे।
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डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि वर्ष 2023 में स्लीप मेडिसिन रिव्यूज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, लगभग 10 करोड़ 40 लाख भारतीय ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (खर्राटे) से प्रभावित हैं। इनमें से करीब 4.7 करोड़ लोग मध्यम से गंभीर श्रेणी में आते हैं। वयस्क पुरुषों में 40 फीसदी और महिलाओं में 20 फीसदी लोग खर्राटों से प्रभावित हैं, जबकि 18 वर्ष से कम आयु के 10 फीसदी बच्चों में भी यह समस्या देखी जाती है।
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कार्यशाला में स्लीप मेडिसिन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने खर्राटे की समस्या से लेकर स्लीप एपनिया के उपचार, सीपैप (सीपीएपी) के उपयोग, स्लीप स्टडी के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और नींद संबंधी विभिन्न विकारों के बारे में भी बताया। केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अमिता नेने, डॉ. ज्योति बाजपाई, डॉ. श्वेता और डॉ. अंकित कुमार को बधाई दी। कार्यशाला के अंत में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।
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सोते समय ऑक्सीजन कम होने पर जा सकती है जान

डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. अजय वर्मा और केजीएमयू के प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा ने बताया कि नींद के दौरान गले, जीभ और मुंह के नरम ऊतक शिथिल होकर सांस के रास्ते (वायुमार्ग) को संकुचित कर देते हैं। हवा के इस संकरे रास्ते से गुजरने पर कंपन होता है। इससे खर्राटे आते हैं। अधिक वजन, पीठ के बल सोना, शराब, उम्र बढ़ना, नाक बंद होना या टॉन्सिल में सूजन इसके प्रमुख कारण हैं। ज्यादा समस्या होने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

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स्लीप एपनिया के लक्षण

मोटापा, छोटी और मोटी गर्दन (कॉलर साइज 42 सेमी से अधिक), डबल चिन, जबड़े या नाक की बनावट में समस्या।



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स्लीप एपनिया के स्वास्थ्य जोखिम

टॉन्सिल का बढ़ना, नाक में रुकावट या भारी जीभ श्वास मार्ग में रुकावट का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से चिड़चिड़ापन, अवसाद और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है।

कार्यक्रम में मौजूद लोग।

कार्यक्रम में मौजूद लोग।

कार्यक्रम में मौजूद लोग।

कार्यक्रम में मौजूद लोग।

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