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यूपी के इस जिले में हो रही है सबसे ज्यादा तस्करी के चंदन की खपत

Tue, 14 Feb 2017 12:47 PM IST
सैयद यासिर रजा/अमरउजाला, लखनऊ
सैयद यासिर रजा/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 14 Feb 2017 12:47 PM IST
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smuggled sandal wood consumption in kannauj up
डेमो - फोटो : demo pic

यूपी के कन्नौज में चंदन लकड़ी की सर्वाधिक खपत हो रही है। सपा सरकार बनने के बाद से ही यहां इत्र के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश ने काम शुरू कर दिया था। इसकी लकड़ी का बुरादा बनाकर उससे इत्र बनाया जाता है। 

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 इसी नाते यहां इसका इस्तेमाल बढ़ता गया यहां यूपी के अलावा दूसरे राज्यों से भी तस्करी चंदन लाया जाता है।  दो तरह की चंदन की लकड़ियां मशहूर हैं- रक्त चंदन या लाल चंदन और पीला चंदन।
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90 के दशक में चंदन तस्कर डाकू वीरप्पन का आतंक दक्षिण भारत में सिर चढ़ कर बोल रहा था। रक्त चंदन के चक्कर में वीरप्पन ने कई पुलिस कर्मियों और वन विभाग के अधिकारियों का अपहरण और हत्या की। वह चंदन की तस्करी पर अपना सिक्का जमाना चाहता था।
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उस समय की सरकारों ने भी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 में संशोधन के बारे में नहीं सोचा। कस्टम डवलपमेंट एक्ट- 1992 में संशोधन करते हुए शिड्यूल छह में रक्त चंदन को शामिल किया गया और इसके बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लग गया।

लाल चंदन या रक्त चंदन की लकड़ी की मांग विदेशों में ज्यादा है। खासकर चीन, जापान, म्यांमार व अन्य पूर्वी एशियाई देशों में इसे रखना स्टेटस सिंबल माना जाता है। इसकी लकड़ी को औषधि भी माना जाता है।

कारोबार के लिहाज से यह इत्र, संगीत के उपकरण और लक्जरी फर्नीचर बनाने में बहुत उपयोगी है। रक्त चंदन की कीमत लाखों में होती है जबकि पीले चंदन की लकड़ी भी 10 से 12 हजार रुपये प्रति किलो बेची जाती है।

बड़े अ‌ध‌िकार‌ियों के घर से पेड़ चोरी

smuggled sandal wood consumption in kannauj up
डेमो - फोटो : demo pic
क्या कोई सोच सकता है कि किसी डीएम या एसएसपी के घर से चोर पेड़ काट ले जाएं? या सेना के मेजर जनरल और या किसी जिला जज के घर से चंदन का पेड़ चोरी हो जाए? शायद नहीं। लेकिन ऐसा हुआ।

लखनऊ विश्वविद्यालय और वनस्पति संस्थान के अलावा बाराबंकी में सीएमओ और डीएफओ के घर से, लखीमपुर में जिलाधिकारी और मुख्य वन अधिकारी के आवास से, सीतापुर में एसएसपी के आवास से और बहराइच में मुख्य वन अधिकारी के आवास में लगा चंदन का पेड़ चोर काट ले गए थे।

कुछ की एफआईआर दर्ज हुई तो कुछ ने बदनामी के डर से दर्ज नहीं कराई। अब चोर पकड़ा गया तो यह भी पता चल रहा है कि कई और जिला वन अधिकारी के घरों से पेड़ चोरी किए गए।

 चंदन की लकड़ी का कारोबार अवैध नहीं है। इसकी लकड़ी चोरी करने या चोरी से पेड़ काटने वालों पर वही कार्रवाई होती है जो एक सामान्य चोरी के अपराध में अभियुक्त के खिलाफ होती है।

यह खुलासा तब हुआ जब चंदन लकड़ी के चोर पुलिस के हत्थे चढ़े और नौबत लिखा पढ़ी की आई। एसटीएफ के अफसरों को भी यह जानकारी नहीं थी कि चंदन का पेड़ चोरी होना बड़ा अपराध नहीं है। 

दरअसल, यूपी में पिछले कुछ महीनों में बड़े अधिकारियों के घरों में लगे चंदन के पेड़ काट कर चोरी हो जाने की घटनाएं सामने आईं तो पुलिस के कान खड़े हुए। चोरों को पकड़ने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स की मदद ली गई।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद चतुर्वेदी को लगाया। चतुर्वेदी ने चंदन तस्करों के बारे में पड़ताल शुरू की तो पता चला कि मध्य प्रदेश के कटनी जिले का चंदन लकड़ी चोर गिरोह इन दिनों गायब है, संभव है कि वह यूपी में ही सक्रिय हो।

 

यूपी में अवैध नहीं चंदन की लकड़ी का कारोबार

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डेमो - फोटो : demo pic
एसटीएफ ने जाल बिछाकर बरेली में गिरोह को ट्रेस कर लिया लेकिन कार्रवाई से पहले ही गिरोह वहां से निकल गया। पता चला कि बस से यह गिरोह कन्नौज के लिए निकला है।

10 फरवरी को एसटीएफ टीम ने शाहजहांपुर के जलालाबाद में बस रोक कर 13 लोगों को चंदन की लकड़ी के साथ गिरफ्तार किया। कई साथी भाग निकले। 
जब एसटीएफ ने लिखा पढ़ी शुरू की तो चोरी की धाराओं से आगे नहीं बढ़ पाई।

वजह, वन्य जीव अधिनियम में प्रतिबंधित पेड़ पौधों की सूची में चंदन का पेड़ शामिल नहीं था। वनअफसरों से जानकारी हासिल की तो वे भी चंदन लकड़ी की चोरी के आरोप में वन विभाग की ओर से कोई और धारा नहीं जोड़ पाए।

इस बाबत मुख्य वन संरक्षक रूपक डे का कहना है कि यूपी में चंदन की लकड़ी का कारोबार प्रतिबंधित नहीं है। हां, बाकी पेड़ों की तरह ही इसका पेड़ काटने से पहले अनुमति लेनी जरूरी होती है।

‘चंदन का पेड़ उगाना कठिन काम है। इसकी लकड़ी के कई फायदे हैं। यह बहुत कीमती मानी जाती है। राज्यों में चंदन की लकड़ी को लेकर अलग- अलग नियम हैं। यूपी में चंदन उगाने, पेड़ काटने या बेचने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बाकी पेड़ों की तरह इसका पेड़ काटने से पहले अनुमति लेनी जरूरी है।’ - रूपक डे, मुख्य वन संरक्षक, उप्र

‘चंदन के पेड़ की चोरी की घटना बिल्कुल वैसी ही है जैसे किसी का मोबाइल चोरी हो जाए। वन विभाग के नियमों में भी यह पेड़ प्रतिबंधित नहीं है। कई अफसरों के घर में इसकी चोरी की वारदात हुई थी, इसलिए एसटीएफ ने इसका भंडाफोड़ किया है।’ -डॉ. अरविंद चतुर्वेदी अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ
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