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मजदूर की ये अपाहिज बेटी बनेगी एमबीबीएस

Fri, 19 Jul 2013 05:37 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 19 Jul 2013 05:37 PM IST
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small village girl clears cpmt, dreams to become doctor

उसने पढ़ाई के लिए संघर्ष किया और आखिरकार कामयाबी हासिल कर ली। छोटे से गांव के मजदूर की बेटी प्रीति के रास्ते में न तो उसकी विकलांगता आड़े आई और न खराब आर्थिक हालात।

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सीपीएमटी के जरिए उसने एमबीबीएस में दाखिले के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। अब वह दाखिले के लिए संघर्ष कर रही है।

जब वह काउंसिलिंग के लिए पहुंची तो किसी उसे यकीन दिलाना पड़ा कि वह काउंसिलिंग की हकदार है।

अब उसका जिला स्तर का प्रमाण पत्र आड़े आ रहा है। आखिरकार उसने अपने आत्मविश्वास के जरिए अधिकारियों को भी मदद के लिए तैयार कर लिया। उसकी काउंसिलिंग 21-22 जुलाई को होनी है।
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सुल्तानपुर के गांव हमजापुर की रहने वाली प्रीति के पिता मजदूर हैं। खराब आर्थिक हालात में उसने पढ़ाई की। कोचिंग के लिए भी पैसा नहीं था लेकिन उसने ठान लिया था कि डॉक्टर बनना है।
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सीपीएमटी का रिजल्ट आया तो उसने 18, 501 सामान्य रैंक और विकलांग कोटे में नौवीं रैंक हासिल की। पैरों से अक्षम प्रीति ने नया आसमान छू लिया। उसके परिवार में भी खुशियों की लहर दौड़ गई।

अब काउंसिलिंग के लिए गुरुवार को वह लखनऊ के एसजीपीजीआई काउंसिलिंग केन्द्र पर पहुंची। पिता के साथ सामान्य कपड़ों में पहुंची सांवले रंग की प्रीति को पहले तो गेट पर ही गार्ड ने झिड़क दिया।

जब उसने बताया कि उसे अपने एमबीबीएस में प्रवेश के लिए काउंसलिंग में हिस्सा लेना है तो पहले किसी को यकीन नहीं हुआ। रैंक देखने के बाद ही उसे काउंसिलिंग कक्ष में जाने की अनुमति मिली।

क्लर्क के पास पहुंची तो उसने भी दस्तावेज पूरे नहीं होने पर झिड़क दिया। प्रीति ने तो जैसे हार मानना ही नहीं सीखा। वह बिना दाखिला वापस लौटने को तैयार नहीं हुई।

उसने अधिकारियों और कर्मचारियों को समझाने में सफल हो गई। सभी उसकी मदद के लिए तैयार हो गए। प्रीति ने बताया कि काउंसिलिंग में विकलांगता का प्रमाण-पत्र आड़े आ रहा है।

अब स्टाफ ने काउंसलिंग में शामिल करने के लिए प्रार्थना-पत्र ले लिया है। प्रीति अपने मजदूर पिता की इकलौती संतान है। प्रीति की काउंसलिंग 21-22 जुलाई को होनी है।


जानकारी नहीं होने के चलते वह तीन दिन पहले ही पहुंच गई थी। अधिकारियों का कहना है कि प्रीति के पास जिला स्तर का प्रमाण-पत्र है लेकिन केजीएमयू से बना प्रमाण-पत्र ही मान्य होगा।

नए प्रमाण पत्र के लिए इतनी जद्दोजहद
प्रीति के पिता ने बताया कि जिला स्तर का प्रमाण पत्र तो है। नया विकलांगता प्रमाण-पत्र के लिए भी वह रिजल्ट निकलने के बाद से ही दौड़ रहे हैं।

काउंसलिंग शुरू होने के बाद भी प्रमाण-पत्र नहीं मिल पाया। पहले उन्होंने यह समझा कि गुरुवार से काउंसिलिंग शुरू हो रही है तो पहले ही दिन पहुंचना है।

यही वजह है कि नए प्रमाण पत्र के बिना ही पहुंच गए। अब समय मिला है तो कोशिश करेंगे कि प्रीति की काउंसिलिंग की तारीख तक नया प्रमाण पत्र बन जाए।

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