जानें, कहां बनेगी स्किल डवलपमेंट यूनिवर्सिटी
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प्रदेश की पहली स्किल डवलपमेंट एंड डिजाइन यूनिवर्सिटी उन्नाव के ट्रांसगंगा परियोजना क्षेत्र में बनेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर सहमति दे दी है। शासन अब कंसल्टेंट तय कर उसकी राय से यूनिवर्सिटी की रूपरेखा तय करने की कार्यवाही करेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के बजट में एक स्किल डवलपमेंट एंड डिजाइन यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान किया था। हालांकि अब तक इस बात की उम्मीद थी कि यह यूनिवर्सिटी राजधानी में ही बनाई जाएगी।
मगर, पिछले 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री उन्नाव में ट्रांसगंगा परियोजना क्षेत्र में प्रस्तावित अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल टाउनशिप का शिलान्यास करने गए तो इसकी स्थापना वहीं करने के विचार की बात कह आए। अब सीएम ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को ट्रांसगंगा क्षेत्र में यूनिवर्सिटी स्थापना से जुड़ी कार्यवाही कराने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा को 15 दिन में प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि शासन ने इस संबंध में विचार-विमर्श किया है। तय हुआ कि नई तरह की यूनिवर्सिटी के मद्देनजर विशेषज्ञ राय के लिए एक कंसल्टेंट जोड़ा जाए। इससे जुड़े विभागों के अधिकारी देश में ऐसी यूनिवर्सिटी का भ्रमण कर जानकारी प्राप्त करें। इसके बाद प्रस्ताव पेश किया जाए।
बड़ोदरा की स्किल यूनिवर्सिटी देखने जाएंगे अफसर
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, गुजरात के बड़ोदरा में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर टेनलीट स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित है।
प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा संजीव मित्तल व सचिव व्यावसायिक शिक्षा भुवनेश कुमार फरवरी के पहले पखवारे में इसे देखने जा सकते हैं। यह यूनिवर्सिटी उद्यमियों से विचार-विमर्श कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप कोर्स डिजाइन करती है।
एकेडमिक काउंसिल में भी उन्हें आमंत्रित करती है। कोर्स में किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी शामिल करती है। इसके बाद प्लेसमेंट दिलाया जाता है। सरकार चाहती है कि प्रदेश में स्किल डवलपमेंट व डिजाइन यूनिवर्सिटी भी इंडस्ट्री की आवश्यकता के हिसाब से विशेषज्ञ मैनपावर तैयार कर सीधे प्लेसमेंट दिलाए।
ताकि हुनरमंद ही बनें विशेषज्ञ
अभी हाईस्कूल के बाद इंटर, स्नातक व पीएचडी, एमए, बीटेक के बाद एमटेक, एमबीबीएस के बाद खास क्षेत्रों में विशेषज्ञता में मास्टर डिग्री प्राप्त की जा सकती है। पर आईटीआई करने वाले आगे कुछ नहीं कर सकते।
सरकार चाहती है कि ऐसे युवा डिग्री से पीएचडी तक कर सकें। प्लंबर का काम शुरू करें तो जिंदगी भर उसी में न जूझते रहें।
1156 एकड़ में विकसित होगी परियोजना
उन्नाव में ट्रांसगंगा परियोजना कन्हवापुर गांव के पास गंगा बैराज के निकट 1156 एकड़ में विकसित होगी। 350 एकड़ में आधुनिक व प्रदूषणमुक्त उद्योग, 150 एकड़ में आवासी परियोजनाएं बनेंगी। 650 एकड़ में कॉमर्शियल संस्थाएं, शैक्षिक संस्थान, अस्पताल व स्टाक एक्सचेंज विकसित करने का प्रस्ताव है।