मोदी सरकार देगी यूपी के सहकारी बैंकों को जीवनदान
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बंद होने के संकट से जूझ रहे प्रदेश के 16 जिला सहकारी बैंकों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार इन बैंकों को लगभग 800 करोड़ रुपये की मदद देने के लिए राजी हो गई है।
इससे इन बैंकों में फिर से कारोबार शुरू हो सकेगा। सहकारी संस्थाओं के पुनरुत्थान के लिए वैद्यनाथन कमेटी ने अलग-अलग पैकेज देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी।
इस पर केंद्र ने प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों को 1545.69 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी। इसमें से 623.41 करोड़ रुपये दे भी दिए थे, पर यह भी कहा था कि शेष 922.28 करोड़ रुपये तब मिलेंगे जब राज्य सरकार वैद्यनाथन कमेटी की शर्तें पूरी करेगी।
इसके तहत बैंकों का स्वतंत्र बोर्ड बनाने के साथ ही निदेशक मंडल की व्यवस्था खत्म करके बैंकों के संचालन का अधिकार बैंक की प्रबंध समिति को देना था। जून 2011 तक ये शर्तें पूरी करनी थीं, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने इन्हें पूरा नहीं किया।
मोदी से लगाई थी मदद की गुहार
नतीजतन केंद्र सरकार ने पैकेज की शेष रकम रोक ली। मोदी सरकार में इन बैंकों के कर्मचारियों ने फिर मदद की गुहार लगाई।
को-ऑपरेटिव बैंक एंप्लाइज यूनियन ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र से दो बार मुलाकात की। पिछले दिनों यूपी को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी एससी द्विवेदी और जीएम केपी शर्मा भी नृपेंद्र मिश्र से मिले थे।
यूनियन के संरक्षक राजेश्वर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार बैंकों के पुनरुद्धार के लिए बजट में 610 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुकी है। 45 करोड़ रुपये पहले से थे। नाबार्ड ने भी दो से ढाई सौ करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई है।
केंद्र सरकार ने शेष लगभग 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जता दी है। केंद्र ने इसके लिए बैंक से प्रस्ताव और राज्य सरकार से आग्रह पत्र मांगा था।
यूपी को-ऑपरेटिव बैंक ने केंद्र को प्रस्ताव भेज दिया है, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से दो-तीन दिन में आग्रह पत्र भेज दिया जाएगा।